MP Election Result 2023: 'खूंटी में किसका टंगने वाला है भविष्य'? 1000 वोटों के मार्जिन से डूब गई थी लुटिया
MP Election Result 2023: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव परिणाम 2023 के खाली खांचों वाले पन्ने भरने तैयार हैं। भरपूर ताकत से लड़े गए सत्ता के संग्राम में हर प्रत्याशी जीतने के ही इरादे से उतरा। 17 नवंबर को 77.15 फीसदी वोटिंग के बाद अब आवाम के कानों में जीत-हार सुनने की खुजलाहट बढ़ गई हैं।
हर कोई जीत के दावों के समुद्र में तैर रहा है और हर घड़ी याद दिलाने की कोशिश कर रहा है कि अगले पांच साल 'हम ही है आपके'। कुल 230 सीटों वाले विधानसभा में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने किसी दल 116 सीट चाहिए। करीब दर्जन भर सर्वे एजेंसियों में से आधे ने बीजेपी की मजबूत स्थिति बताकर कांग्रेस की हवा खराब कर दी। लेकिन कांग्रेस को एजेंसियों के आंकड़ों से ज्यादा इत्तेफाक नहीं रख रही।

यह भी सच है कि कुछ एग्जिट पोल में दिखाए गए वोट शेयर परसेंटेज में बीजेपी-कांग्रेस के बीच बहुत ज्यादा फासला नहीं है। ऐसे में ऊंट किस करवट बैठेगा, अनुमानित परिणाम एक तरफा नहीं कहे जा सकते। इस चुनाव में बेचैनी भरी तस्वीर तो उन इलाकों में भी है, जहां बीजेपी के दिग्गज चुनाव मैदान में बड़ी रणनीति के साथ उतारे गए।
चंबल में केन्द्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से लेकर महाकौशल में प्रहलाद पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते की मौजूदगी से नई हवा चली। मालवा की डोर बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के हाथों दी तो विंध्य, महाकौशल में सांसद रीती पाठक, उदय प्रताप सिंह, राकेश सिंह की तिकड़ी चर्चा में हैं। बुदनी में शिवराज सिंह और छिंदवाड़ा में कमलनाथ अपने नाम के सहारे पूरे प्रदेश के चुनाव का मोर्चा संभाले रहे।
इन सभी ने अपनी जीत के साथ पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने का दंभ भरा हैं। लेकिन पब्ल्कि कहने लगी कि यदि सभी जीत रहे है तो भला हारेगा कौन? विशेषतौर पर ऊपर दिए बीजेपी दिग्गजों के नामों को लेकर चर्चा हैं। कहा जा रहा है कि पिछली बार जिन सीटों और उसके आसपास के इलाकों में बीजेपी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा, वहां ताकत बढ़ाने ऐसे लोगों को दांव पर लगाया गया। दबी जुबान में ये सभी अपनी जीत के मार्जिन का जो अनुमान लगाकर बैठे है, वह भी लोगों के गले नहीं उतर रहा।
जरा याद करो वो 1000 वोट
लोग 2018 के चुनाव नतीजे को भी याद रखे है। क्योकि दस सीट ऐसी थी जिसमें हजार वोटों के मार्जिन से बीजेपी की लुटिया डूब गई थी। हारने वाले प्रत्याशियों में सिटिंग मिनिस्टर तक रहे। कांग्रेस को पूर्ण बहुमत से दो सीट कम सही, लेकिन बड़े दल के नाते सरकार बनाने का मौका मिला था। बीजेपी की सीटों में भी ज्यादा फर्क नहीं था। पिछले बार ऐसी सीटों की हार की बदौलत सत्ता से बेदखल हुई बीजेपी के सामने इस बार भी वही सवाल खड़ा है।
दांव पर लगा सियासी करियर!
तीन केन्द्रीय मिनिस्टर, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव समेत जिन सांसदों की प्रतिष्ठा इस इलेक्शन में दांव पर है, उनमें नरेंद्र सिंह तोमर, रीती पाठक और जबलपुर पश्चिम से राकेश सिंह बराबरी पर आने संघर्ष करते दिखे। वोटिंग के एक हफ्ते पहले की दिन-रात की मेहनत ने काफी हद तक स्थिति में सुधार भी किया, लेकिन एक तरफा नतीजे बताकर जीत के दावे में संशय है। इनमें से जो भी जीत के खांचे में नहीं बैठा तो उसका सियासी भविष्य क्या होगा? क्या उनका राजनीतिक करियर किसी खूंटी पर टंग जाएगा?












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