जल संरक्षण के MP में शुरू होंगे 990 कार्य, सीएम यादव ने कहा- 3 हजार 90 करोड़ रुपए की आएगी लागत
MP News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव बुधवार 5 जून को रायसेन पहुंचे। यहां झिरी बहेडा स्थित बेतवा नदी के उद्गम स्थल पर जल गंगा संवर्धन अभियान के शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत 3 हजार 90 करोड़ लागत के जल संरक्षण के 990 कार्य आज से प्रदेश में आरंभ हो रहे हैं।
सीएम मोहन यादव ने जनता को संबोधित करते हुए कहा बेतवा नदी का उद्गम भोपाल के पास से ही होता है और यहां का जल गंगा बेसिन में मिलता है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधन ईश्वरीय देन हैं। इनकी महत्ता को स्वीकारने और उसके संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत रहने के उद्देश्य से ही प्रतिवर्ष पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की परम्परा आरंभ हुई।

पौधों में प्राण होते हैं इस तथ्य को सिद्ध करने वाले प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु ने कहा था कि भारतीय संस्कृति पौधों को जीवंत ही मानती है और उसी संवेदनशीलता के साथ उन्हें पूज्यनीय माना जाता है। कहा कि अभियान के अंतर्गत 3 हजार 90 करोड़ लागत के जल संरक्षण के 990 कार्य आज से प्रदेश में आरंभ हो रहे हैं।
प्रत्येक जिले, विकासखंड और पंचायत स्तर पर जल संरचनाओं की मरम्मत, पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण के लिए जनभागीदारी से गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इस दौरान सीएम यादव के साथ जनजातीय भाई-बहनों ने 108 पौधों का रोपण किया। आपको बता दें कि सीएम यादव ने कहा कि पीएम मोदी ने नदियों के संरक्षण के लिए नमामि गंगे अभियान आरंभ किया।
इसी प्रकार उनकी पहल पर केन-बेतवा-लिंक परियोजना के लिए 45 हजार करोड़ रुपए मध्यप्रदेश को तथा 45 हजार करोड़ रूपए उत्तरप्रदेश को उपलब्ध करवाए गए। नदी जोड़ो अभियान की इस महती पहल से बुंदेलखंड का संपूर्ण क्षेत्र सिचिंत होगा और क्षेत्रवासियों की पेयजल संबंधी समस्या का भी समाधान होगा।
इसी प्रकार राजस्थान के साथ पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो अभियान के लिए मध्यप्रदेश में 35 हजार करोड़ और राजस्थान में 35 हजार करोड़ रुपए से गतिविधियां संचालित की जाएंगी। पीएम मोदी की इस पहल के लिए हम सब उनके आभारी हैं। सीएम यादव ने कहा कि हमारे प्रदेश में कई नदियों के उद्गम स्थल हैं जो जीवन के स्त्रोत के समान महत्वपूर्ण हैं।
जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत नदियों के उद्गम स्थलों के संरक्षण के लिए कार्यक्रम निरंतर जारी रहेंगे। अभियान के अंतर्गत जल संरचनाओं के प्रति जनजागृति और जल सम्मेलन जैसी गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी।












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