क्रांतिकारी करतार सिंह सराभा की जयंती पर CM मोहन यादव ने किया नमन, कही ये खास बात
MP News:मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने क्रांतिकारी करतार सिंह सराभा की जयंती पर उन्हें नमन किया। इस दौरान सीएम यादव ने कहा कि आपके विचारों एवं कार्यों से आजादी के आंदोलन ने एक नई धार पकड़ी थी। मां भारती की स्वतंत्रता के लिए आपका बलिदान हर भारतीय के हृदय में सदैव अंकित रहेगा।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार 24 मई को अपने 'X' हैंडल पर क्रांतिकारी करतार सिंह सराभा की तस्वीर पोस्ट की। साथ ही, सीएम यादव ने लिखा, भारत को परतंत्रता की बेड़ियों से आजाद कराने के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति देने वाले, मां भारती के वीर सपूत, अमर क्रांतिकारी करतार सिंह सराभा जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन करता हूं।

इतना ही नहीं, सीएम यादव ने आगे लिखा कि आपके विचारों एवं कार्यों से आजादी के आंदोलन ने एक नई धार पकड़ी थी। मां भारती की स्वतंत्रता के लिए आपका बलिदान हर भारतीय के हृदय में सदैव अंकित रहेगा। आपको बता दें कि करतार सिंह सराभा का जन्म 24 मई, 1896 को लुधियाना के सराभ गांव में हुई था।
करतार सिंह सराभा के पिता का नाम मंगल सिंह और माता का नाम साहिब कौर था। ऐसा बताया जाता है कि करतार सिंह के बचपन में ही इनके पिता का निधन हो गया था। जिसके बाद करतार सिंह और इनकी छोटी बहन धन्न कौर का पालन-पोषण दादा बदन सिंह ने किया था।
11वीं की परीक्षा पास करने के बाद परिवार ने उच्च शिक्षा के लिए उन्हें 15 साल की उम्रअमेरिका भेज दिया गया था। यहां अंग्रेजों द्वारा भारतीय आप्रवासियों के साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार को देख कर इनके मन में देशभक्ति की भावनाएं पनपने लगीं। इसके बाद करतार सिंह सराभा पार्टी के सक्रिय सदस्य बनें।
इतना ही नहीं, करतार सिंह ने मूल अमेरिकियों से बंदूक चलाना और विस्फोटक बनाना तथा हवाई जहाज उड़ाना सीखा था और 2 मार्च, 1915 को करतार सिंह सराभा अपने दो दोस्तों के साथ भारत लौट आए थे। भारत वापस आने के तुरंत बाद वह सरगोधा में चक नंबर 5 पर गए और विद्रोह का प्रचार करना शुरू कर दिया।
इसके लिए उन्हें हरनाम सिंह टुंडा लाट और जगत सिंह को गिरफ्तार करके लाहौर सेंट्रल जेल में बंद कर दिया गया। अदालत में सुनवाई के दौरान करतार सिंह सराभा ने विद्रोह के आरोपों को स्वीकार किया। 16 नवम्बर (कहीं 17 नवम्बर), 1915 को करतार सिंह सराभा को उनके 6 अन्य साथियों के साथ लाहौर जेल में फांसी देकर शहीद कर दिया गया।












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