आपातकाल का दौर लोकतंत्र पर बहुत बड़ा धब्बा, CM मोहन यादव ने कहा- कांग्रेस को मांगनी चाहिए माफी
MP News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1975 में आपातकाल लगाने के लिए कांग्रेस पार्टी से माफ़ी मांगने को कहा। सीएम यादव ने कहा कि आपातकाल में कई परिवार तबाह हो गए और ये लोकतंत्र पर बहुत बड़ा धब्बा है। उन्होंने कहा कि आज भी देश आपातकाल को याद करके सिहर उठता है।
सीएम मोहन यादव ने मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए कहा, आपातकाल का दौर लोकतंत्र पर बहुत बड़ा धब्बा है। ये ऐसा समय है जिसे देश आज भी याद करके सिहर उठता है। कांग्रेस को माफी मांगनी चाहिए। आपातकाल में कई परिवार तबाह हो गए। भाजपा ने संविधान की रक्षा को अपनी निष्ठा माना है।

इतना ही नहीं, सीएम यादव ने आगे कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए भाजपा के सारे नेता जेल गए... लोकतंत्र के उस काले कार्यकाल के लिए ये सारे के सारे लोग जवाबदार हैं जो आज नकली संविधान लेकर एक तरह से आडंबर रच रहे हैं। बता दें कि जून 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया था।
जिसके कारण विपक्षी नेताओं और असंतुष्टों को जेल में डाल दिया गया था, साथ ही प्रेस सेंसरशिप भी लगाई गई थी। आपातकाल की 49वीं वर्षगांठ मनाने के लिए, भाजपा ने कांग्रेस की 'तानाशाही' और संविधान के प्रति उसकी अवहेलना को 'उजागर' करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम की योजना बनाई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आपातकाल के काले दिन हमें याद दिलाते हैं कि कैसे कांग्रेस पार्टी ने बुनियादी स्वतंत्रता को खत्म किया और संविधान को रौंदा, जिसका हर भारतीय सम्मान करता है। सीएम यादव ने मोदी से सहमति जताते हुए कहा कि आपातकाल का दौर लोकतंत्र पर एक बड़ा दाग है।
उन्होंने कहा कि आज भी पूरा देश इसे याद करके कांप उठता है और कांग्रेस की ज्यादतियों के कारण कई परिवार बर्बाद हो गए। वहीं, सीएम मोहन यादव ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि कैसे इस दौरान संविधान की रक्षा और लोकतंत्र को बचाने के लिए जनसंघ (अब भारतीय जनता पार्टी) के नेताओं को जेल में डाला गया था।
आपातकाल के दौरान सरकारी अत्याचार और दमन के खिलाफ उनके संघर्ष को हमेशा याद रखा जाएगा। भारत में आपातकाल 25-26 जून 1975 से 21 मार्च 1977 (21 महीने) तक चला, इस दौरान चुनाव स्थगित कर दिए गए और सभी नागरिक अधिकार समाप्त कर दिए गए।
इंदिरा गांधी के कहने पर तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद द्वारा भारतीय संविधान की धारा 352 के तहत घोषित यह अवधि स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे विवादास्पद और अलोकतांत्रिक समय में से एक है।












Click it and Unblock the Notifications