MP assembly election 2023: कौन सी है रणनीति? सूबे के 7 फीसदी में से 1 मुस्लिम कैंडिडेट! BJP-Congress की लिस्ट
MP assembly election 2023: देश-प्रदेश की सियासत के बड़े कुनबे में हर दल का खास वोट बैंक, चुनाव परिणाम तय करते आया हैं। मौजूदा वक्त पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव का हैं। जिसमें मध्य प्रदेश भी शामिल हैं। जहां बीजेपी-कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला नई सत्ता की कुर्सी तय करेगा।
बीजेपी अब तक उम्मीदवारों की चार और कांग्रेस एक लिस्ट जारी कर चुकी हैं। चुनाव घोषणा के पहले बीजेपी ने 39, 39 और 1 प्रत्याशियों के नामों के साथ तीन लिस्ट जारी की थी। फिर चुनाव का ऐलान होते ही 57 प्रत्याशियों के नामों का ऐलान हुआ। इस तरह 136 सीटों पर बीजेपी प्रत्याशियों के चेहरे सामने आ गए।
पितृ पक्ष खत्म होने और नवरात्रि की शुभ घड़ी के इंतजार में कांग्रेस, प्रत्याशियों की लिस्ट अटकाए रखी। लेकिन जैसे ही मुहूर्त आते ही कांग्रेस ने एक साथ 144 कैंडिडेट्स के साथ पहली लिस्ट जारी कर दी। इस तरह बीजेपी-कांग्रेस के अब तक 280 प्रत्याशी सामने हैं। लेकिन दोनों प्रमुख दलों की ऊपर से नीचे तक लिस्ट देखने पर जातिगत समीकरण, जरुर सामने उभार रहे हैं।

बेहद चौकाने वाली बात यह है कि बीजेपी-कांग्रेस दोनों के द्वारा घोषित अब तक के 280 उम्मीदवारों में सिर्फ एक मुस्लिम पर भरोसा जताया गया हैं। वो भी कांग्रेस ने राजधानी भोपाल में आरिफ मसूद को टिकट दिया हैं। बीजेपी की चार सूची के 136 प्रत्याशियों में एक भी मुस्लिम कैंडिडेट नहीं हैं। जबकि मध्य प्रदेश में जाति-धर्म को कुल आबादी के आंकड़े के लिहाज से देखें तो सूबे में करीब 7 फीसदी आबादी मुस्लिमों की हैं। ऐसा भी नहीं है कि बीजेपी ने जिन 136 और कांग्रेस ने 144 सीटों पर प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किया, वहां से पहले कभी मुस्लिम नेताओं को प्रतिनिधित्त्व न मिला हो।
बावजूद इस बार के चुनाव में ये नया ट्रेंड सियासत की नई इबारत की तरफ इशारा कर रहा हैं। हालांकि अभी दोनों प्रमुख दलों से कुल 180 प्रत्याशी और घोषित होना बाकी हैं। फिर भी अब तक की जारी सूची में सिर्फ एक मुस्लिम प्रत्याशी को जगह मिलना आश्चर्यजनक हैं। जबकि खासतौर पर मुस्लिम वोट बैंक को, कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक के रूप गिना जाता रहा हैं। इस मामले में एमपी में बीजेपी का मिजाज कांग्रेस से अलग ही रहा हैं।
ओबीसी का दम
बात सिर्फ मुस्लिम वर्ग ही नहीं, बल्कि आधी आबादी को पूरा हक देने की बात करने वाले इन दोनों दलों का दिल, महिलाओं के प्रति दिलदार नजर नहीं आया। बीजेपी ने करीब 12 फीसदी तो कांग्रेस ने सिर्फ 13 फीसदी महिलाओं को उम्मीदवार बनाया हैं। बीजेपी के 136 प्रत्याशियों में 16 और कांग्रेस के 144 में से 19 महिलाएं चुनाव मैदान में हैं। ओबीसी कार्ड के तौर पर बीजेपी का आंकड़ा 40 प्रत्याशियों को छू रहा है। वहीं कांग्रेस के 39 प्रत्याशी मैदान में हैं।
सवर्ण का सहारा
सवर्ण वर्ग के प्रति अब तक बीजेपी-कांग्रेस ने दरियादिली दिखाई हैं। कांग्रेस ने 52 तो बीजेपी ने 48 सवर्ण चेहरों को प्रत्याशी सूची में जगह दी। हालांकि अभी करीब 40 फीसदी सीटों के टिकट घोषित होना बाकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि जातिगत आधार पर आगे की लिस्ट में उम्मीदवारों के नामों की किस तरह खिचड़ी पकती हैं? क्योकि इस बार के चुनाव में बीजेपी या कांग्रेस दोनों दलों के लिए चुनाव मैदान में छोटे दलों को भूलना भारी महंगा साबित हो सकता हैं। ऊपर से बगावती नेताओं की ताकत नतीजों के समीकरण बदलने के लिए काफी हो सकते हैं।












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