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MP News: मेडिकल कॉलेज रिश्वत कांड, CBI ने 55 लाख रुपये की घूस के मामले में 3 डॉक्टरों सहित 6 को किया गिरफ्तार

MP News: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर स्थित श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (SRIMSR) को मान्यता दिलाने के लिए 55 लाख रुपये की रिश्वत लेने के सनसनीखेज मामले में बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने तीन डॉक्टरों-डॉ. मंजप्पा सीएन, डॉ अशोक शेलके, और डॉ सतीश ए-समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है।

अन्य आरोपी डॉ चैत्रा एमएस, उनके पति रविचंद्रन, और SRIMSR मैनेजमेंट से जुड़े अतुल कुमार तिवारी हैं। इस मामले में सीबीआई ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, और दिल्ली में 40 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की।

Medical college bribery CBI arrests 6 including 3 doctors in Rs 55 lakh bribe case

रिश्वत की रकम हवाला के जरिए बेंगलुरु में लेन-देन के दौरान बरामद की गई, जिसमें से 16.62 लाख रुपये डॉ. चैत्रा के पति रविचंद्रन और 38.38 लाख रुपये डॉ सतीश के पास से जब्त किए गए। यह मामला चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करता है और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की मान्यता प्रक्रिया में पारदर्शिता की जरूरत को रेखांकित करता है।

मामले का विवरण

श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च, नवा रायपुर ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से मान्यता प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। 30 जून 2025 को NMC की चार सदस्यीय डॉक्टरों की टीम-डॉ. मंजप्पा सीएन, डॉ. सतीश ए, डॉ अशोक शेलके, और डॉ. चैत्रा एमएस-कॉलेज के निरीक्षण के लिए SRIMSR पहुंची थी। सीबीआई के अनुसार, इन डॉक्टरों ने कॉलेज मैनेजमेंट के अतुल कुमार तिवारी के साथ मिलकर सकारात्मक निरीक्षण रिपोर्ट देने के लिए 55 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी।

सीबीआई को सूचना मिली थी कि SRIMSR के पदाधिकारी निरीक्षण करने वाली टीम को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस सूचना के आधार पर, सीबीआई ने बेंगलुरु में एक जाल बिछाया, जहां रिश्वत का लेन-देन हो रहा था। डॉ. मंजप्पा सीएन ने इस साजिश में मुख्य भूमिका निभाई और डॉ. सतीश को 55 लाख रुपये हवाला के जरिए इकट्ठा करने का जिम्मा सौंपा। डॉ मंजप्पा ने अन्य टीम सदस्यों को भरोसा दिलाया कि उनका हिस्सा डॉ. सतीश के जरिए उन तक पहुंच जाएगा। सीबीआई ने सटीक समय पर कार्रवाई करते हुए सभी छह आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। रिश्वत की रकम में से 16.62 लाख रुपये डॉ. चैत्रा के पति रविचंद्रन और 38.38 लाख रुपये डॉ. सतीश के पास से बरामद किए गए।

छापेमारी और गिरफ्तारी

सीबीआई ने इस मामले में कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, और मध्य प्रदेश में 40 से अधिक ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की। इन छापेमारियों में आरोपियों के आवासीय और आधिकारिक परिसरों की तलाशी ली गई, जिसके दौरान नकदी, दस्तावेज, और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई। सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि रिश्वत की रकम बेंगलुरु में लेन-देन के दौरान पकड़ी गई, और यह राशि निरीक्षण करने वाले डॉक्टरों की मांग के अनुसार पहुंचाई गई थी।

सभी छह आरोपियों को बुधवार, 2 जुलाई 2025 को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें 5 दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया गया। रायपुर के वीआईपी रोड स्थित सीबीआई कार्यालय में इनसे गहन पूछताछ की जाएगी। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि आरोपियों के परिवार और वकील रोजाना आधे घंटे के लिए उनसे मिल सकते हैं।

श्री रावतपुरा सरकार ट्रस्ट का बयान

भिंड स्थित श्री रावतपुरा सरकार लोक कल्याण ट्रस्ट के मैनेजर विशाल गर्ग ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "नवा रायपुर स्थित SRIMSR कॉलेज हमारे ट्रस्ट का हिस्सा है। मैं अभी बाहर हूं और इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दे सकता।" ट्रस्ट की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन यह मामला ट्रस्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है। खास तौर पर, SRIMSR पहले भी विवादों में रहा है, जिसमें फर्जी फिंगरप्रिंट्स से फैकल्टी अटेंडेंस, निरीक्षण के दौरान अस्थायी स्टाफ की भर्ती, और डमी मरीजों का इस्तेमाल जैसे आरोप शामिल हैं।

बचाव पक्ष का दावा

आरोपियों के वकील अखिलेश सोनी ने रायपुर की विशेष अदालत में दलील दी कि सीबीआई द्वारा लगाए गए रिश्वत के आरोप "निराधार और गलत" हैं। उन्होंने कहा, "डॉक्टर अपनी ईमानदारी से निरीक्षण के लिए आए थे, लेकिन उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया। हवाला के जरिए रिश्वत की बात में कोई सच्चाई नहीं है।" वकील ने यह भी दावा किया कि सीबीआई के पास इस मामले में ठोस सबूत नहीं हैं और डॉक्टरों को अनुचित रूप से गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, सीबीआई ने रंगे हाथ गिरफ्तारी और बरामद रकम को मजबूत सबूत बताया है।

भ्रष्टाचार की पृष्ठभूमि और अन्य मामले

यह पहला मौका नहीं है जब मेडिकल कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। मई 2025 में, सीबीआई ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग के प्रमुख डॉ. तपन कुमार जाना को 10 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। उस मामले में, डॉ जाना ने कर्नाटक के बेलगावी के एक निजी मेडिकल कॉलेज को सकारात्मक निरीक्षण रिपोर्ट देने के लिए रिश्वत मांगी थी। छापेमारी के दौरान 44.6 लाख रुपये नकद और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए थे।

श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट भी पहले से विवादों में रहा है। इसे फर्जी अटेंडेंस, निरीक्षण के दौरान डमी मरीजों का इस्तेमाल, और अस्थायी स्टाफ की भर्ती जैसे आरोपों का सामना करना पड़ा है। ये घटनाएं चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों और NMC की मान्यता प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को उजागर करती हैं।

कानूनी प्रभाव

इस मामले ने चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में भ्रष्टाचार और नैतिकता के गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया में भ्रष्टाचार न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, बल्कि भविष्य के डॉक्टरों की ट्रेनिंग और मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल उठाता है। मैनिट भोपाल के प्रोफेसर और शैक्षिक सुधार विशेषज्ञ डॉ. राजेश गुप्ता ने कहा, "ऐसे मामले चिकित्सा शिक्षा की विश्वसनीयता को धूमिल करते हैं। NMC को अपनी निरीक्षण प्रक्रिया में तकनीकी और नैतिक सुधार लाने होंगे।"

विपक्ष का हमला

कांग्रेस ने इस मामले को लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। छत्तीसगढ़ के नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने कहा, "SRIMSR जैसे संस्थानों में भ्रष्टाचार बीजेपी सरकार की नाकामी का सबूत है। मेडिकल शिक्षा को बाजार बना दिया गया है।"

सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस मामले पर चिंता जताई और कहा, "हम सीबीआई की जांच का समर्थन करते हैं। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।" उन्होंने NMC और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से इस मामले में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की। सीबीआई ने स्पष्ट किया कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और अन्य संभावित संलिप्त लोगों की तलाश की जा रही है।

सुझाव और भविष्य के कदम

इस मामले ने मेडिकल कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया में सुधार की तत्काल जरूरत को उजागर किया है। निम्नलिखित उपाय इस तरह के भ्रष्टाचार को रोकने में मदद कर सकते हैं:

  • डिजिटल निरीक्षण प्रक्रिया: NMC को निरीक्षण प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाना चाहिए, जिसमें वीडियो रिकॉर्डिंग और ऑनलाइन रिपोर्ट सबमिशन शामिल हो।
  • सख्त दिशानिर्देश: रिश्वत और प्रभाव के लिए कठोर दंड और नियम लागू किए जाएं।
  • स्वतंत्र ऑडिट: मेडिकल कॉलेजों के निरीक्षण के लिए स्वतंत्र तृतीय-पक्ष ऑडिटर नियुक्त किए जाएं।
  • जागरूकता और प्रशिक्षण: NMC के मूल्यांकनकर्ताओं के लिए नैतिकता और पारदर्शिता पर प्रशिक्षण अनिवार्य हो।
  • सार्वजनिक निगरानी: निरीक्षण रिपोर्ट्स को सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराया जाए ताकि जनता और मीडिया निगरानी कर सकें।
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