मंदसौर में किसानों के आंदोलन का अगुवा है संघ का ही एक पूर्व नेता

भाजपा का आरोप था कि पार्टी ने उनकी खनन पट्टों समेत दूसरी अवैध मांगों को पूरा नहीं किया इसलिए शिवकुमार किसानों को भड़काकर सरकार को ब्लैकमेल करते हैं।

नई दिल्ली। अपनी फसल के उचित दाम और कर्जमाफी को लेकर मध्य प्रदेश में आंदोलन कर रहे किसानों का विरोध प्रदर्शन अब हिंसात्मक रूप ले चुका है। बुधवार को मध्य प्रदेश बंद के दौरान किसानों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। वहीं, गुरुवार को टोल प्लाजा पर तोड़-फोड़ और लूट की खबरें आई हैं। सरकार ने भी स्वीकार किया है कि 5 किसानों की मौत पुलिस की गोलियों से हुई है। इस पूरे आंदोलन के पीछे आरएसएस के ही एक पूर्व नेता हैं, जो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए सिरदर्द बने हुए हैं।

कौन कर रहा है किसानों का नेतृत्व

कौन कर रहा है किसानों का नेतृत्व

किसानों के आंदोलन का नेतृत्व आरएसएस के पूर्व नेता और राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के राष्ट्रीय संयोजक शिवकुमार शर्मा कर रहे हैं। शिवकुमार शर्मा ने इससे पहले मई 2012 में मध्य प्रदेश के बरेली में किसानों के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। शिवकुमार उस समय भारतीय किसान संघ के महासचिव थे। 2012 के विरोध प्रदर्शन के दौरान भी किसानों का आंदोलन हिंसक हुआ था और आंदोलनकारियों ने कई वाहनों समेत सरकारी संपत्ति को आग के हवाले कर दिया था।

2012 में भी हुआ था हिंसक आंदोलन

2012 में भी हुआ था हिंसक आंदोलन

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की पिटाई भी की थी। पुलिस फायरिंग में एक किसान की मौत हुई थी और कई घायल भी हुए थे। हालांकि पुलिस प्रशासन ने फायरिंग करने की बात से इंकार किया। इसके बाद नवंबर 2012 में गठित राज्य सरकार के एक पैनल ने जांच की और उसमें सामने आया कि पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया और 23 राउंड फायरिंग हुई, जिनमें से 18 गोलियां एके-47 से चलाईं गई।

भाजपा की मांग पर आरएसएस ने किया निष्कासित

भाजपा की मांग पर आरएसएस ने किया निष्कासित

शिवकुमार शर्मा के खिलाफ कई धाराओं में केस दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया। इसके बाद भाजपा ने शिवकुमार के निष्कासन की मांग की और आरएसएस ने उन्हें संघ से बाहर कर दिया। भाजपा का आरोप था कि पार्टी ने उनकी खनन पट्टों समेत दूसरी अवैध मांगों को पूरा नहीं किया इसलिए शिवकुमार किसानों को भड़काकर सरकार को ब्लैकमेल करते हैं। जेल से जमानत पर छूटने के बाद शिवकुमार ने रजिस्ट्रार ऑफ फर्म्स एंड सोसाइटीज से संपर्क किया और कहा कि उसका निष्कासन गैरकानूनी है। इसके बाद से वह किसानों के संगठन के नेता बने हुए हैं।

चुनाव में मिले महज 424 वोट

चुनाव में मिले महज 424 वोट

फरवरी 2013 में शिवकुमार ने लाखों किसानों के समर्थन का दावा करते हुए किसान मजदूर प्रजा पार्टी का गठन किया। शिवकुमार ने उस साल विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारने का ऐलान भी किया। चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने शर्मा के खिलाफ आपराधिक मामलों को वापस लेना शुरू कर दिया, ताकि वह उनके साथ चुनाव के दौरान अपनी शर्तों को सामने रख सके। नवंबर 2013 के चुनाव में शिवकुमार ने एक औपचारिक लड़ाई लड़ी और उन्हें 3.38 करोड़ वोट में से सिर्फ 424 वोट मिले। इसपर शिवकुमार ने कहा कि वह अपने ऊपर से मुकदमे हटाए जाने के खिलाफ थे।

'किसानों पर है 45 हजार करोड़ का कर्ज'

'किसानों पर है 45 हजार करोड़ का कर्ज'

किसानों के आंदोलन पर शिवकुमार शर्मा का कहना है कि किसानों में यह गुस्सा पिछले कई सालों से था, यह अचानक नहीं हुआ है। यह कई सालों से दबी हुई भावनाओं का विस्फोट है। शिवकुमार ने कहा कि सरकार किसानों को दबाने के बजाय आत्मनिरीक्षण करे। उन्होंने कहा कि मंगलवार को 8 किसान मारे गए थे। शिवकुमार ने किसानों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील भी की है। उन्होंने कहा कि राज्य के किसान 45 हजार रुपए के कर्ज के बोझ तले दबे हैं।

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