OMG! जिस पत्थर को कुलदेवता के रूप में पूजते थे गांव वाले, अचानक निकला डायनासोर का अंडा
मध्य प्रदेश में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां धार जिले के पाडल्या गांव में खेती के दौरान मिले पत्थर जैसी वस्तु को कई सालों से लोग कुलदेवता के रूप में पूजा कर रहे थे। लेकिन, जैसे ही विशेषज्ञों की एक टीम ने गांव का दौरा किया तो, चौंकाने वाला सच सामने आया। इस बात का खुलासा हुआ कि वो पत्थर नहीं, बल्कि डायनासोर के अंड्डा है। उसके बाद गांव में खलबली मच गई।
लोगों की मान्यता था कि कुलदेवता उनके खेत और पशुधन को कठिनाइयों और दुर्भाग्य से बचाएंगे। धार के पाडल्या में ग्रामीण खेती के दौरान मिले पत्थरों को 'काकड़ भैरव' या भिल्लड़ बाबा के रूप में पूजते रहे हैं। गांव निवासी वेस्ता मंडलोई ने कहा कि हम भिल्लड़ बाबा को नारियल चढ़ाते थे और पूजा करते थे। ग्रामीण बारिश के दौरान बकरे भी चढ़ाते थे।

हालांकि, जब विशेषज्ञों की एक टीम ने गांव का दौरा किया, तो पाया कि पत्थर लाखों साल पुराने डायनासोर के अंडे थे। प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) एएस सोलंकी ने कहा कि जिले में 2011 में एक डायनासोर पार्क था। कई बार आसपास के गांवों में उसके जीवाश्म पाए जाते रहे हैं। लोग उनकी पूजा करना शुरू कर देते हैं।
250 से अधिक डायनासोर के अंडे मिल चुके
जिले में अब तक ऐसे 250 से अधिक डायनासोर के अंडे मिल चुके हैं। ऐसा माना जाता है कि मध्य प्रदेश की नर्मदा घाटी में डायनासोर अच्छी संख्या में थे। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि डायनासोर लगभग 175 मिलियन वर्ष पहले पृथ्वी पर घूमते थे। इनमें से हजारों प्रजातियां लगभग 65 मिलियन वर्ष पहले विलुप्त हो गईं।












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