चीता प्रोजेक्ट: अब कूनो में नहीं, देश-प्रदेश के अन्य अभयारण में आएंगे चीते!

कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) श्योपुर में अब चीते नहीं लाए जाएंगे। यहां पूर्व में 20 चीते लाए गए थे, जिनमें से 3 चीतों की अलग-अलग कारणों से जान जा चुकी है, तो भारत की धरती पर जन्में 3 चीता शावकों की मौत हो चुकी है। चीता प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के मंथन में यह बात सामने आई है कि प्रोजेक्ट के तहत भविष्य में आने वाले चीतों को अन्य चिन्हित अभयारण्यों में बसाया जाए।

Cheetah Project: अब Kuno में नहीं, मध्य प्रदेश-देश के अन्य अभयारण में आएंगे चीते!

Kuno में चीता प्रोजेक्ट को लेकर बीते रोज ग्वालियर में चीता स्टेयरिंग कमेटी की बैठक का आयोजन किया गया। इसमें बताया गया कि कूनो में अब नए चीते नहीं लाए जाएंगे। जो चीते पहले आ चुके हैं, उन्हें बेहतर तरीके से यहां बसाना होगा, वंशवृद्धि कराई जाएगी। नए चीते आएंगे तो उन्हें प्रदेश के नौरादेही, गांधी सागर सहित देश के अन्य 5 चिन्हित ​अभयारण्यों में लाया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि चीता प्रोजेक्ट तैयार करते समय मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में सात स्थान चिह्नित किए गए थे, जहां नए चीतों को भेजा जाएगा। बैठक में इस बात की पुष्टि बातचीत के दौरान चीता स्टेयरिंग कमेटी के चेयरमैन राजेश गोपाल ने की। उन्होंने श्योपुर जिले की कूनो सेंचुरी में मौजूद चीतों की निगरानी और प्रबंधन को लेकर ग्वालियर में हुई बड़ी बैठक में यह बात कही। बैठक में उत्तर प्रदेश के वन अधिकारियों को भी शामिल किया गया।

कूनो के चीते कहीं और शिफ्ट नहीं होंगे, अफ्रीका से 50 चीते आने हैं
ग्वालियर में आयोकजित चीता स्टेयरिंग कमेटी की बैठक में राजेश गोपाल बताया कि कूनो के चीतों को कहीं और शिफ्ट करने का कोई प्लान नहीं है। हालांकि नए चीतों को दूसरे स्थान पर भेजा जा सकता है। दक्षिण अफ्रीका से कुल 50 चीते लाए जाने हैं। इनमें से 20 चीते कूनो में आए हैं। वे यहां के मौसम के अनुसार फिलहाल खुद को नहीं ढाल पाए हैं। इस कारण तीन चीतों व तीन शावकों की मौत हो चुकी है। चीतों को यहां के वातावरण में ढलने के लिए कम से कम एक से डेढ़ साल का समय लगेगा।

UP की सीमा में चीते पहुंचेंगे तो वहां के वनकर्मी सुरक्षा करेंगे
चीता प्रोजेक्ट में कूनो के चीते नेशनल पार्क के दायरे को पार कर शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क, यूपी और राजस्थान की सीमा तक पहुंच रहे हैं। इसी कारण चीता स्टेयरिंग की बैठक में यूपी के वन अधिकारियों को भी शामिल किया गया था। इसमें बताया गया कि कूनो के चीते कई दफा एनपी की सीमा लांघ कर उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सीमा वाले वन क्षेत्रों में पहुंच चुके हैं उन्हें तीन बार उत्तर प्रदेश की सीमा से ट्रैंकुलाइज कर वापस लाया गया था। अब उत्तर प्रदेश की सीमा में पहुंचने वाले चीतों की सुरक्षा वहां के मैदानी वन कर्मचारी करेंगे।

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