Kuno National park: कूनो नेशनल पार्क से दुखी कर देने वाली खबर, एक और मादा चीता धात्री (टिबलिसी) की मौत

Kuno National park News: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से दुखी कर देने वाली खबर सामने आई है। दरअसल, लगातार हो रही चीजों की मौत का सिलसिला जारी है। बुधवार को एक और मादा चीता तिबलिश का शव मिला है। फिलहाल मादा चीते की मौत के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है। बता दे अब तक कुछ दिनों में श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में छह चीते और तीन शवकों की मौत हो चुकी है।

Sad news from Kuno National Park, death of another female cheetah

बताया जा रहा है कि मरने वाली मादा चीता का नाम धात्री (टिबलिसी) था। मुख्य वन संरक्षक असीम श्रीवास्तव ने बताया कि टिबलिसी सुबह मृत पाई गई। मौत की वजह पता लगाने की कोशिश की जा रही है। पोस्टमार्टम के बाद ही पता चल सकेगा की मौत कैसे हुई।

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    बता दे कूनो प्रबंधन ने प्रेस नोट जारी करके बताया कि कूनो नेशनल पार्क में बाड़े में रखे गए 14 चीतें (7 नर, 6 मादा और एक शावक) स्वस्थ हैं। कोलू और नामीबिया के बने प्राणी वरिष्ठ विशेषज्ञ लगातार उन पर नजर बनाए हुए हैं। इसके अलावा खुले जंगल में घूम रही दो माताजी तो पर भी निगरानी रखी जा रही है।

    बता दें, कि नामीबिया से 8 चीतों का पहला सेट पिछले साल 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया था और अन्य 12 चीते इस साल फरवरी में दक्षिण अफ्रीका से लाए गए थे।

    11 मार्च को पहले दो चीतों को जंगल में छोड़े जाने के बाद से कूनो नेशनल पार्क में अभी तक 6 वयस्क चीतों और तीन शावकों की मौत हो गई है।

    एक्सपर्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट को लिखी थी चिट्ठी

    राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा दायर एक याचिका पर, जनवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने चीता परियोजना पर 2013 में लगाए गए प्रतिबंध को हटा दिया था। हालांकि, अदालत चीता परियोजना की निगरानी अभी भी कर रही है। वहीं, दक्षिण अफ्रीका से लाए गए दो चीतों तेजस और सूरज की मौत के बाद, जिनकी मौत की वजह रेडियो कॉलर इन्ज्यूरी थी, दक्षिण अफ़्रीकी पशु चिकित्सा वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ एड्रियन टॉर्डिफ ने अपने सहयोगियों की ओर से एक पत्र पर हस्ताक्षर किए और उस चिट्ठी को सुप्रीम कोर्ट भेजा।

    इस पत्र पर चीता विशेषज्ञ विंसेंट वैन डेर मेरवे, वन्यजीव पशुचिकित्सक डॉ. एंडी फ़्रेज़र और डॉ माइक टॉफ़्ट के भी हस्ताक्षर हैं। करीब-करीब उसी समय, नामीबिया के चीता संरक्षण कोष के कार्यकारी निदेशक डॉ लॉरी मार्कर ने भी सुप्रीम कोर्ट को एक और पत्र लिखा, जिसमें टॉर्डिफ़ के पत्र के समान मुद्दों को ही बताया गया था।

    इंडियन एक्सपर्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूछे जाने पर, कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की थी, एक्सपर्ट मार्कर ने बताया, कि "विशेषज्ञों के साथ बेहतर कम्युनिकेशन, विशेषज्ञों पर भरोसा करने की जरूरत, बेहतर अवलोकन (निगरानी) और नियमित रूप से विशेषज्ञों के साथ उन चीतों की स्थिति को लेकर रिपोर्ट शेयर करने की जरूरत है।"

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