Khajuraho Dance Festival-2023: खजुराहो के वैभवशाली मंच पर "अभंग रंग" से रामायण की प्रस्तुति
खजुराहो में आयोजित हो रहे 49 वें डांस फेस्टिवल के मंच पर देश के विभिन्न प्रांतो से आए चोटी के कलाकार नृत्य की प्रस्तुतियां दे रहे हैं। दूसरे दिन अभंग रंग की प्रस्तुति में कलाकारों ने श्रीराम की लीलाओं के कथानक का भावपूर्

Khajuraho Dance Festival-2023: 'खजुराहो नृत्य महोत्सव 2023' के दूसरे दिन श्रीलक्ष्मी गोवर्धनन के कुचिपुड़ी, मैथिल देविका और संगियों के मोहिनी अट्टम तथा वैभव आरेकर व साथियों के भरतनाट्यम नृत्य की चपल थिरकन से खजुराहो का वैभव दमक उठा। वैभव आरेकर और उनके नौ साथियों के भरतनाट्यम नृत्य की प्रस्तुति दी। उन्होंने खजुराहो के वैभवशाली मंच पर "अभंग रंग" की प्रस्तुति दी। दरअसल, इस प्रस्तुति को रामायण से लिया गया था। विष्णुजी के अवतार भगवान राम की महिमा को बखान करते तीन कथानकों में ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और सीता स्वयम्बर की कथा को वैभव और उनके साथियों ने नृत भावों अंग और पद संचालन से बखूबी पेश किया। ये सम्पूर्ण प्रस्तुति मराठी अभंगों पर की गई। प्रस्तुति के अंत में अभंग में विट्ठल दर्शन की प्रस्तुति दी गई।

यूनेस्को की धरोहर में शामिल खजुराहो के पश्चिम मंदिर समूह परिसर में नृत्य महोत्सव की शुरुआत कुचिपुड़ी नृत्य से हुई। ख्याति प्राप्त नृत्यांगना श्रीलक्ष्मी गोवर्धनन ने कुचिपुड़ी के विशेष तरंगम प्रारूप में उन्होंने कृष्ण स्तुति से नृत्य की शुरुआत की। दरअसल यह स्तुति पूतना के कथानक पर थी। श्रीलक्ष्मी ने नृत्य भावों में ऐसे पिरोया कि दर्शक विभोर हो गए। अंत मे कृष्ण द्वारा पूतना वध करने और उसे मोक्ष प्रदान करने के अभिनय ने भी दर्शकों को एक अलग ही अनुभूति कराई। श्रीलक्ष्मी ने तरंगम से अपने नृत्य का समापन किया। कर्नाटक शैली के विभिन्न रागों और तालों से सजी यह प्रस्तुति अदभुत थी। इसके बाद कुचिपुड़ी में तरंगम में श्रीलक्ष्मी ने पीतल की थाली की रिम यानी किनारी पर लयबद्ध होकर पैरों की गति को नृत्य कौशल का प्रदर्शन किया।
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शंकराचार्य कृत सौंदर्य लहरी और श्रीनारायण गुरु कृत भद्रकाली अष्टकम की प्रस्तुति
महोत्सव में अगली प्रस्तुति मोहिनी अट्टम की रही। इसमें कलाकार मैथिल देविका और उनके साथी धनुक़ एवं अर्जुन की टीम ने मोहिनीअट्टम की इस प्रस्तुति से खूब रंग भरे। देविका और उनके साथियों ने तीन प्रस्तुतियां दीं। पहली प्रस्तुति आदि शंकराचार्य कृत सौंदर्य लहरी से थी। इस कृति में मां भगवती के अद्वैत से लेकर भक्ति की तांत्रिक क्रियाओं को बखूबी नृत्य मुद्राओं के साथ पेश किया। अगली कड़ी में उन्होंने श्री नारायण गुरु कृत भद्रकाली अष्टकम पर प्रस्तुति दी। महोत्सव के दूसरे दिन की प्रस्तुति का पर्दा कलाकार वैभव आरेकर और उनके नौ साथियों के भरतनाट्यम नृत्य से हुआ।












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