MP News: बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा लिखित पत्र देख भावुक क्यों हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, जानिए
20 जनवरी 2025, दिल्ली: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिल्ली के राष्ट्रीय डाक टिकट संग्रहालय में आयोजित संविधान की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित प्रदर्शनी का दौरा किया।
इस प्रदर्शनी में भारतीय संविधान और गणतंत्र पर जारी किए गए डाक टिकटों का विशेष संग्रह प्रदर्शित किया गया था। सिंधिया प्रदर्शनी के पहले विजिटर बने और इस दौरान उन्होंने बच्चों, डाक टिकट संग्राहकों (Philatelists) और कलाकारों से मुलाकात की।

डाक टिकट संग्रह के महत्व पर दिया संदेश
इस अवसर पर, सिंधिया ने डाक टिकट संग्राहकों से बातचीत करते हुए चिट्ठी लिखने की प्रथा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "चिट्ठी लिखने की जो भावना होती है, वह ईमेल या संदेश के माध्यम से नहीं आ सकती।" यह संदेश उन्होंने खासकर उन डाक टिकट संग्राहकों से साझा किया जिन्होंने इस प्रदर्शनी के आयोजन में योगदान दिया था। सिंधिया ने खुद भी कॉलेज के दिनों में डाक टिकट संग्रह करने का अनुभव साझा किया और कहा कि चिट्ठी लिखने का आनंद कुछ और ही होता है।
बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा लिखी चिट्ठी पर भावुक हुए सिंधिया
दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय डाक टिकट संग्रहालय में संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित प्रदर्शनी के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक ऐतिहासिक चिट्ठी को देखा, जिसे संविधान के रचयिता बाबा साहेब अंबेडकर ने लिखा था। इस चिट्ठी को देखकर सिंधिया भावुक हो गए। उन्होंने इस अवसर पर चिट्ठी लिखने की परंपरा की अहमियत पर जोर दिया और कहा कि चिट्ठी लिखने में जो भावनाएँ व्यक्त होती हैं, वह आज के ईमेल या संदेशों में नहीं आ पातीं।

इस प्रदर्शनी में भारतीय संविधान और गणतंत्र पर जारी किए गए डाक टिकटों के साथ-साथ कई ऐतिहासिक चिट्ठियाँ भी प्रदर्शित की गई थीं, जिन्हें National Archives of India से प्राप्त किया गया था। इन चिट्ठियों में से एक चिट्ठी बाबा साहेब अंबेडकर की थी, जो खासतौर पर ध्यान आकर्षित करने वाली थी। सिंधिया ने इस चिट्ठी को देखकर सभी से पत्र लिखने की प्रथा को पुनः जीवित करने का आह्वान किया।

संविधान पर विशेष पोस्टकार्ड का विमोचन
सिंधिया ने संविधान पर आधारित डाक विभाग द्वारा प्रकाशित विशेष पोस्टकार्ड का भी विमोचन किया। यह पोस्टकार्ड संविधान की रूपरेखा को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किए गए थे, और उनका उद्देश्य संविधान की महत्ता को जन-जन तक पहुंचाना था।
बच्चों से मुलाकात और म्यूजियम की खरीदारी
इसके साथ ही, केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली के विभिन्न स्कूलों से आए बच्चों से भी मुलाकात की। उन्होंने बच्चों के उत्साह और उनके प्रश्नों का उत्तर दिया, जिससे उनके ज्ञान में वृद्धि हो। इसके बाद, सिंधिया ने म्यूजियम की दुकान से खरीदारी करते हुए एक लकड़ी से बना मिनी पोस्ट बॉक्स खरीदा और UPI के माध्यम से भुगतान किया। यह एक आदर्श उदाहरण था कि किस तरह हम डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि हम पारंपरिक चीजों को भी संजोए रखते हैं।
संविधान की महत्ता और भविष्य की पीढ़ी को प्रेरित करना
अपने संबोधन में, सिंधिया ने संविधान की महत्ता को बताते हुए कहा, "संविधान हमारे देश का ग्रंथ है और यह हमें हमारे अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में मार्गदर्शन प्रदान करता है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से हम नई पीढ़ी को हमारे संविधान की गौरवपूर्ण यात्रा से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।" उन्होंने सभी नागरिकों से इस प्रदर्शनी को देखने का आह्वान किया और कहा कि यह उनके लिए एक ऐतिहासिक और शिक्षाप्रद अनुभव हो सकता है।
संविधान की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित इस प्रदर्शनी ने न केवल भारतीय संविधान की ऐतिहासिकता को उजागर किया, बल्कि लोगों को यह याद दिलाया कि हमारे संविधान ने हमारे राष्ट्र की नींव रखी है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का यह दौरा निश्चित रूप से संविधान और इसके महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद करेगा।












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