'रोजा था, जैसे ही पता चला भागा...', इंदौर मंदिर हादसे में संकटमोचक बनकर आए अब्दुल माजिद, रोते हए बयां की कहानी
Indore Temple Tragedy: इंदौर मंदिर हादसे पर अपडेट देते हुए पुलिस आयुक्त मकरंद देओस्कर ने कहा कि अब तक 36 शव बरामद किए गए हैं, एक व्यक्ति लापता है, तलाश जारी है। बचाव कार्य जारी है।

Indore Temple Tragedy: मध्य प्रदेश के इंदौर में बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर हादसे में 36 लोगों की मौत हो गई है। जबकि 18 लोग अब भी घायल हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। रामनवमी के दिन हुए इंदौर मंदिर हादसे में बचाव कार्य अब भी जारी है। फिलहाल अब भी एक शख्स लापता है। बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर (Baleshawar Mahadev Mandir) पर बावड़ी के ऊपर की छत धंस जाने से ये बड़ा हादसा हुआ था।
इंदौरा हादसे की भयावह तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर लोगों की आंखें नम कर दी है। इसी बीच सिविल डिफेंस वर्कर अब्दुल माजिद फारुकी की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। उन्होंने एक मीडिया चैनल को इंटरव्यू में इंदौर मंदिर हादसे की कहानी बताई। ये कहानी बयां करते वक्त उनकी आंखें नम हो गई थी।
'मैंने रोजा रखा था...लेकिन जैसे ही पता चला...'
सिविल डिफेंस वर्कर अब्दुल माजिद फारुकी ने बताया कि जिस वक्त उन्हें इंदौर के बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर हादसे रे बारे में पता चला, वह दौड़ते हुए वहां गए। उन्होंने कहा कि उनका रोजा चल रहा था लेकिन इसकी परवाह किए बिना लोगों की जान बचाना उनकी पहली प्राथमिकिता थी।
आज तक से बात करते हुए इंदौर के काजी अब्दुल माजिद फारुकी ने कहा, ''मैं 11:30 बजे गार्डन में थे, उसी दौरान मुझे मंदिर से भगदड़ मचने की आवाज सुनाई दी। जैसे ही घटना के बारे में पता किया तो पता चला कि वहां हादसा हो गया है। उसके बाद मैं वहां फौरन गया। उस वक्त हमारे साथ वहां सिविल डिफेंस के कई कार्यकर्ता मौजूद थे। पुलिस के आने से पहले वहां हम लोग पहुंच गए थे, वहां काफी भीड़ थी लेकिन हमने वहां फौरन रेस्क्यू शुरू कर दिया।''

रोजा खोलने का भी नहीं था याद
अब्दुल माजिद फारुकी ने कहा, 'जब मैं घटना स्थल पर पहुंता तो देखा वहां अफरा-तफरी मची हुई थी। वहां कई लोग मेरी जान पहचान के थे। मेरी कॉलोनी के बहुत सारे लोग वहां थे। हमने वहां पुलिस का इंतजार किए बिना बचाव कार्य शुरू कर दिया। हमारी सिविल डिफेंस की टीम लगातार रेस्क्यू में जुटी हुई थी। हमने लगभग 12 से 13 लोगों की जान बचाई।'
अब्दुल माजिद फारुकी ने आगे कहा कि बचाव कार्य करते हुए उन्हें रोजा खोलने का भी याद नहीं था। अब्दुल माजिद फारुकी ने कहा, ''हमारे एक संजय भाई ने रोजा खोलने को लेकर याद दिलाया। फिर उन्ही ने मेरा रोजा भी खोलवाया।'' घटना का जिक्र करते हुए कई बार अब्दुल माजिद फारुकी भावुक हुए।












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