IAS Weds IFS : लव मैरिज में तपस्या परिहार बोलीं-'पापा मैं दान की चीज नहीं हूं, मत करो मेरा कन्यदान'

ias tapasya parihar: उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में ट्रेनिंग के दौरान कई अफसर जोड़े दिल दे बैठते हैं। कुछ ऐसा ही साल 2018 बैच की आईएएस (IAS) अधिकारी तपस्या परिहार व आईएफएस (IFS) अधिकारी गर्वित गंगवार के साथ हुआ। इनकी प्रेम कहानी से ज्यादा चर्चे शादी के हो रहे हैं।

तपस्‍या परिहार इन दिनों सुर्खियों में है। दरअसल, ये इस वक्‍त मध्‍य प्रदेश के जिला पंचायत सीईओ पद पर हैं। हाल ही निलंबित शिक्षक विशाल अस्थाना एक आवेदन लेकर इनके पास आया और जांच को ठंडे बस्ते में डालने के लिए जिला पंचायत सीईओ तपस्या परिहार को 50 हजार रुपये की रिश्वत बंद लिफाफे में देने का प्रयास करने लगा तो परिहार ने शिक्षक को गिरफ्तार कर थाने पहुंचा दिया।

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    कन्यादान की रस्म नहीं निभाई

    कन्यादान की रस्म नहीं निभाई

    नरसिंहपुर जिले के करेली के पास गांव जोबा में हुई आईएएस तपस्या परिहार व आईएफएस गर्वित गंगवार की शादी सुर्खियों में आने की खास वजह ये है कि तपस्या ने शादी में कन्यादान जैसी रस्म नहीं निभाई और इसके पीछे उनका जो तर्क था उसने हर किसी का दिल जीत लिया।

    ट्रेनिंग की दोस्ती प्यार में बदली

    ट्रेनिंग की दोस्ती प्यार में बदली

    दरअसल, यूपीएससी 2018 पास करने के बाद तपस्या और गर्वित की मुलाकात मसूरी में ट्रेनिंग के दौरान हुई। पहले दोस्ती हुई जो बाद में प्यार में बदल गई। तपस्या को मध्य प्रदेश और गर्वित गंगवार को तमिलनाडु कैडर मिला। दोनों अपने अपने कैडर में चले गए और बातें-मुलाकातों का सिलसिला जारी रहा।

    जोबा गांव में हुई तपस्या व गर्वित की शादी

    जोबा गांव में हुई तपस्या व गर्वित की शादी

    अपना प्यार पाने के लिए गर्वित गंगवार ने शादी के आधार पर कैडर बदलने का आवेदन किया। नवंबर 2021 में तमिलनाडु से मध्य प्रदेश कैडर में चले आए। इससे पहले दोनों जुलाई में कोर्ट मैरिज की थी। अब 12 दिसम्बर को नरसिंहपुर जिले के गांव जोबा में पार​म्परिक रीति रिवाज से शादी की व रिसेप्शन रखा।

    मैं आपकी बेटी हूं पापा और हमेशा रहूंगी

    मैं आपकी बेटी हूं पापा और हमेशा रहूंगी

    शादी में पिता द्वारा बेटी का कन्यादान करने की रस्म निभाने बारी आई तो आईएएस तपस्या परिहार ने यह कहकर कन्यादान से इनकार कर दिया कि ​'पापा मैं दान करने की चीज नहीं हूं। मैं आपकी बेटी हूं पापा और हमेशा रहूंगी। यह सुनकर हर कोई उनके फैसले की तारीफ करता दिखा।

    समाज की विचारधारा बदलने की इच्छा

    समाज की विचारधारा बदलने की इच्छा

    मीडिया से बातचीत में आईएएस तपस्या परिहार कहती हैं कि बचपन से ही मेरे मन में समाज की इस विचारधारा को लेकर लगता था कि कैसे कोई अपनी बेटी का कन्यादान कर सकता है। वह भी उसकी बगैर इच्छा के। यही बात धीरे-धीरे मैंने अपने परिवार से चर्चा की इसी बात को लेकर परिवार भी मान गए और वर पक्ष भी इस बात के लिए राजी हो गए कि बगैर कन्यादान किए भी शादी की जा सकती ह।

    आईएफएफ पति ने किया सपोर्ट

    आईएफएफ पति ने किया सपोर्ट

    आईएफ़एस गर्वित गंगवार कहते हैं कि क्यों किसी लड़की को शादी के बाद पूरी तरह बदलना होता है। चाहे मांग भरने की बात या कोई ऐसी परंपरा जो यह सिद्ध करें कि लड़की शादी शुदा है जबकि यह लड़के के लिए कभी लागू नहीं होता और इस तरह की मान्यताओं को हमें धीरे-धीरे दूर करने की कोशिश करनी चाहिए।

    कौन हैं आईएएस तपस्या परिहार

    कौन हैं आईएएस तपस्या परिहार

    बता दें कि तपस्या परिहार मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के करेली के पास छोटे से गांव जोबा की रहने वाली हैं। अपने दूसरे प्रयास में साल 2018 में 23वीं रैंक के साथ यूपीएससी पास की थी। वर्तमान में सेंदबा एसडीएम के पद पर तैनात है।

    आईएएस तपस्या परिहार की जीवनी

    आईएएस तपस्या परिहार की जीवनी

    गांव जोबा के किसान विश्वास परिहार व सरपंच ज्योति परिहारके घर 22 नवंबर 1992 को तपस्या का जन्म हुआ। तपस्या बचपन से ही पढ़ने में होशियार थीं। उनकी स्कूलिंग सेंट्रल स्कूल से हुई और उन्होंने 10वीं और 12वीं दोनों में अपने स्कूल में टॉप किया। इन्होंने यूपीएससी की तैयारी दिल्ली में रहकर की।

    शादी कार्ड भी रखा सामान्‍य

    शादी कार्ड भी रखा सामान्‍य

    तपस्या और गर्वित ने शादी के कार्ड में अपनी अखिल भारतीय सेवा के अफसर होने का जिक्र नहीं किया है। दोनों इसे भी ठीक नहीं मानते हैं। इनका कहना है कि ये सब बताने और दिखाने की बात नहीं है।

    पुरानी रस्‍में ठीक नहीं लगती

    पुरानी रस्‍में ठीक नहीं लगती

    तपस्या कहती हैं कि शादी के बाद बहू को मंगल सूत्र पहनाना पड़ता है। मांग भी भरनी पड़ती है। सिर्फ इसलिए क्योंकि बेटे की आयु बढ़े, सरनाम बदले भी तो हमारा। सिर्फ एक व्यक्ति के लिए दूसरा ही त्याग करता रहे। मुझे ये चीजें शुरू से पसंद नहीं रहीं। इसलिए जब शादी में कन्यादान की रस्म भी नहीं निभाई।

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