Guna Loksabha: गुना की जनता के मन में कौन, किसने किया वादा पूरा, किसने सिर्फ सपने दिखाए
Lok Sabha Election की हलचल के बीच अब गुना लोकसभा सीट पर 7 अप्रैल को जनता अपने मताधिकार का प्रयोग करेगी, जहां इससे पहले प्रचार-प्रसार का सिलसिला थम चुका है। वहीं वन इंडिया हिंदी की टीम जब गुना लोकसभा की आम जनता के बीच पहुंची, तो जनता ने अपनी-अपनी बात वन इंडिया हिंदी के साथ साझा की है, जहां जनता ने नेताओं के वादों और दामों की हकीकत का बखान भी किया।
गुना के रहने वाले आनंद अग्रवाल बताते हैं कि, गुना नगर पालिका परिषद ने गुना का सत्यानाश किया हुआ है, ना तो यहां कोई सफाई है, स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं, लेकिन उनमें कोई संकेत नहीं लगे हैं, रोड खुदी पड़ी हैं। पूरा गुना अस्त-व्यस्त स्थिति में नजर आ रहा है, जिस मुद्दे को लेकर सिंधिया ने सरकार गिराई थी, और बोले थे कि, सड़क पर उतारूंगा, लेकिन क्या यह सड़क पर उतरे। मंत्री बनने के बाद भी इन्होंने किसान के मुद्दे को नहीं उठाया। इन्हें विकास से कोई मतलब नहीं है।

गुना के रहने वाले संजीव कुमार आर्य बताते हैं कि, किसान लगातार 30 सालों से संघर्ष कर रहे हैं, शिक्षा के क्षेत्र में प्राइमरी स्कूल की हालत खराब है, स्वास्थ्य में जीरो है, इस लोकसभा में सबसे ज्यादा किसान और ग्रामीण क्षेत्र का वोट बैंक है। इसके बाद भी किसानों पर पूरी राजनीति होती है, किसान राजनीति के चक्कर में पिस रहा है। बमोरी विधानसभा के लोकल नेता दोनों ही पार्टियों के टिकट फिक्स करने के लिए ऊपरी नेताओं की चरण वंदन करते हैं, और अपना नंबर बढ़ाते हैं। गरीब और किसान की समस्या से उन्हें कोई लेना-देना नहीं है।
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गुना के रहने वाले सुंदरलाल बताते हैं कि, मैं किसान परिवार से आता हूं, बमोरी विधानसभा में हमारा गांव आता है। नेता सभी वादे तो लंबे-लंबे करते हैं, लेकिन वादों पर खरे उतरने में नेता नाकामयाब रहे हैं। हमारी मूल समस्या पानी की है। हालत इतनी खराब है, जिसके चलते हमें महंगी खेती करनी पड़ रही है। 5-5 लख रुपए में ट्यूबवेल पड़ता है। मोटर में पानी नहीं आता। हमारी सारी कमाई उसी में लग जाती है। नेता जो बोल रहे हैं, उतना अनुकूल विकास नहीं है, और विकास के साथ-साथ विनाश भी चल रहा है।
युवा व्यवसाय बताते हैं कि, रोजगार में 65 प्रतिशत आबादी युवा है। सरकार किसी की हो, किसी ने आज तक कितना विकास किया हो, युवाओं के लिए क्या किया है?, 2 करोड़ रोजगार हर वर्ष देने का जो वादा आपके मेनिफेस्टो में था, वह युवाओं का रोजगार कहां है, पकोड़ा तलने को अगर आप रोजगार बोलते हैं, तो फिर पढ़ाई लिखाई के लिए आप इतने स्कूल क्यों खोल रहे हैं?, उसे बंद कर दीजिए। 2014 में किसान की दोहरी आय की बात की थी। इस बार आपके मेनिफेस्टो से किसान शब्द ही गायब है। किसान की दोहरी आए तो छोड़िए, जो मुद्दे लेकर आए थे। वही गायब हैं।
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