MP News: गुजरात पटाखा फैक्ट्री हादसा, बॉयलर ब्लास्ट पर नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने उठाए सवाल, सरकार पर तीखा हमला
MP News: गुजरात के बनासकांठा जिले में मंगलवार, 1 अप्रैल 2025 की सुबह एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण बॉयलर विस्फोट ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। डीसा के पास इस हादसे में मध्य प्रदेश के 21 मजदूरों की जान चली गई, जबकि 3 लोग गंभीर रूप से घायल हैं और 5 को मामूली चोटें आई हैं।
यह त्रासदी उस वक्त हुई, जब मजदूर पटाखे बनाने में जुटे थे। धमाका इतना जोरदार था कि फैक्ट्री की इमारत ढह गई, मलबे में कई लोग दब गए, और मानव अंग 50 मीटर दूर तक बिखर गए। इस घटना ने न केवल मजदूरों की सुरक्षा, बल्कि सरकार की नीतियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दो दिन पहले आए थे, छिन गई जिंदगी
मरने वाले सभी मजदूर हरदा जिले के हंडिया और देवास जिले के संदलपुर गांवों से थे। ये लोग दो दिन पहले ही मजदूरी की तलाश में गुजरात पहुंचे थे। फैक्ट्री में काम शुरू करने के चंद घंटों बाद ही यह हादसा हो गया। धमाके की चपेट में आए मजदूरों में परिवार के कई सदस्य भी शामिल थे, जैसे राकेशभाई नायक, उनकी पत्नी दलिबेन और बेटी किरेनबेन। हंडिया गांव के एक परिजन ने रोते हुए कहा, "वो बोला था कि इस बार ईद के लिए अच्छा पैसा कमाकर लौटेगा, लेकिन अब उसकी लाश भी पूरी नहीं मिली।" मध्य प्रदेश के इन गांवों में मातम का माहौल है, और परिजन सरकार से जवाब मांग रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष का तीखा हमला
इस हादसे पर मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमग सिंघार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, "गुजरात के बनासकांठा में पटाखा फैक्ट्री में बॉयलर फटने से 17-18 लोगों की मृत्यु की दुखद खबर मिली है, जिसमें मध्य प्रदेश के कई मजदूर शामिल हैं। ये लोग दो दिन पहले ही मजदूरी के लिए गए थे। हर दिन रोजगार का ढोल पीटने वाली सरकार इतनी नाकाम हो चुकी है कि मजदूरों को पलायन करना पड़ रहा है, और वहां उनकी जान तक चली जा रही है।" उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि आखिर मजदूरों को अपने राज्य में रोजगार क्यों नहीं मिल रहा, जिसके चलते उन्हें ऐसी जोखिम भरी जगहों पर काम करने जाना पड़ता है।
नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने आगे कहा, "इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। लापरवाही के दोषियों को चिन्हित कर सख्त सजा दी जाए। मध्य प्रदेश सरकार पीड़ित परिवारों को तुरंत मुआवजा दे और घायलों का बेहतर इलाज सुनिश्चित करे।" उन्होंने ईश्वर से मृतकों की आत्मा की शांति और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की।
हादसे का खौफनाक मंजर
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सुबह 8 बजे हुए इस विस्फोट ने आसपास के इलाके को हिलाकर रख दिया। फैक्ट्री से आग की लपटें और काला धुआं उठता देख लोग दहशत में आ गए। धमाके की तीव्रता ऐसी थी कि मजदूरों के शरीर के टुकड़े खेतों में बिखर गए। फायर ब्रिगेड को आग बुझाने में 5-6 घंटे लगे। डीसा की एसडीएम नेहा पांचाल ने बताया, "तीन मजदूर 40 प्रतिशत से ज्यादा झुलस गए हैं और उनकी हालत गंभीर है। मलबे में और लोग दबे हो सकते हैं, इसलिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी से चल रहा है।" बचाव दल अब भी मलबे को हटाने में जुटा है, और मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
मजदूरों की लिस्ट और परिवारों का दर्द
हादसे में मारे गए मजदूरों में राकेशभाई, सुरेशभाई, विजयभाई (23 साल), विष्णुभाई, धनराजभाई जैसे कई नाम शामिल हैं। लखनभाई गंगारामभाई नायक का पूरा परिवार इस त्रासदी का शिकार बन गया, जिसमें उनकी 13 साल की बेटी लखन नी मोती बेन भी थी। हरदा और देवास के इन गांवों में अब सन्नाटा पसरा है। एक मृतक की बहन ने कहा, "हमारे पास अब कोई सहारा नहीं बचा। सरकार हमें क्या जवाब देगी?"
जांच और मुआवजे की मांग
हादसे के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी हुई थी। सूत्रों का कहना है कि यह फैक्ट्री बिना वैध लाइसेंस के चल रही थी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी शोक जताया और गुजरात सरकार से बात कर पीड़ितों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। लेकिन नेता प्रतिपक्ष ने इसे नाकाफी बताते हुए कहा, "सिर्फ शोक जताने से काम नहीं चलेगा। मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।"












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