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MP News: मध्य प्रदेश में बेरोजगारों के लिए बड़ी खुशखबरी: 37 हजार नौकरियां मिलेंगी मल्टीनेशनल कंपनियों से

MP News: मध्य प्रदेश में बेरोजगारों के लिए एक शानदार अवसर सामने आया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में बजट में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने का ऐलान किया है। इस नीति के तहत मध्य प्रदेश में 37 हजार नौकरियां सृजित की जाएंगी।

केंद्रीय बजट में बड़ा ऐलान

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में यह घोषणा की कि जीसीसी पॉलिसी के जरिए राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। इस नीति के तहत मध्य प्रदेश सरकार ने 31 जनवरी 2025 को ही इस पॉलिसी को मंजूरी दी, जो अगले साल के भीतर 50 से ज्यादा जीसीसी सेंटर खोलने का लक्ष्य रखती है।

God news for unemployed people in MP 37 thousand jobs will be provided from multinational companies

क्या है ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC)?

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) का मतलब है ऐसे केंद्र जो विभिन्न देशों के बाजारों के लिए सेवा और सपोर्ट प्रदान करते हैं। ये कंपनियां, जो विभिन्न क्षेत्रों में काम करती हैं, अपनी वैश्विक ऑपरेशंस को इन सेंटरों के माध्यम से प्रबंधित करती हैं।

इन सेंटरों में सॉफ्टवेयर, कस्टमर सर्विस, डेटा एनालिसिस, ह्यूमन रिसोर्स, और अन्य बैक-ऑफिस कार्य किए जाते हैं। ये सेंटर मैन्युफैक्चरिंग, मार्केटिंग और रिसर्च जैसे कार्यों के लिए भी इस्तेमाल होते हैं।

मध्य प्रदेश में GCC के जरिए रोजगार के अवसर

मध्य प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे टियर-2 शहरों को ग्लोबल ऑपरेशनल सेंटर (GOC) के रूप में विकसित किया जाए। इस नीति के तहत 37 हजार से ज्यादा रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। इन केंद्रों से न केवल स्थानीय रोजगार पैदा होगा बल्कि इससे राज्य के युवाओं को भी अवसर मिलेंगे।

मुख्य आकर्षण

बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों का आकर्षण: मध्य प्रदेश सरकार की जीसीसी पॉलिसी के तहत माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और वॉलमार्ट जैसी प्रमुख कंपनियां राज्य में अपना ऑपरेशन स्थापित करने के लिए तैयार हैं।

40% पूंजी निवेश सब्सिडी: राज्य सरकार इन कंपनियों को 40% पूंजी निवेश पर सब्सिडी देगी। इसके अलावा, कंपनी को कुल निवेश पर अधिकतम 30 करोड़ रुपए तक की सब्सिडी मिल सकती है।

नौकरियां और निवेश: इस योजना से मध्य प्रदेश में नए जीसीसी सेंटर खुलेंगे, जो आईटी, बैक-ऑफिस सपोर्ट, कस्टमर सर्विस और प्रोफेशनल सर्विसेज जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान करेंगे।

कैसे मिलेगा रोजगार?

इसके तहत, रोजगार के अवसर कंपनियों द्वारा स्थानीय कर्मचारियों को नियुक्त करने के रूप में प्रदान किए जाएंगे। इसके साथ ही, आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और योग्य उम्मीदवारों को ही नियुक्त करने का प्रयास किया जाएगा।

इस योजना से शैक्षिक संस्थानों और तकनीकी प्रशिक्षण केंद्रों में अध्ययनरत छात्रों को भी रोजगार मिलने की संभावना है। इस अवसर को ध्यान में रखते हुए, युवाओं को कंप्यूटर साइंस, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, बिजनेस मैनेजमेंट और अन्य तकनीकी क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

एमपी सरकार ने जीसीसी पॉलिसी इसलिए लाई है क्योंकि:

45 लाख रोजगार के अवसर (2030 तक)

भारत में जीसीसी सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और 2030 तक इस सेक्टर में 45 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। मध्य प्रदेश में लगभग 26 लाख बेरोजगार हैं, और इस पॉलिसी के जरिए राज्य ने इस बढ़ते रोजगार अवसर का फायदा उठाने का फैसला किया है।

आईटी सेक्टर में सैलरी में वृद्धि

एमपी में आईटी सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, और जीसीसी सेक्टर में आईटी कर्मचारियों की सैलरी आईटी सेक्टर से 20% ज्यादा हो सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक, जीसीसी में एआई/एमएल इंजीनियर का शुरुआती वेतन 8.2 लाख तक हो सकता है, जो अनुभव बढ़ने के साथ 43 लाख तक पहुंच सकता है।

हर साल 50 हजार इंजीनियर पासआउट होते हैं

एमपी में हर साल 50 हजार से ज्यादा इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स पासआउट होते हैं और 2 लाख से ज्यादा आईटी प्रोफेशनल्स राज्य में काम कर रहे हैं। एमपी सरकार मानती है कि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स इन पेशेवरों की रोजगार जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगे।

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