MP News: इंदौर के महू गैंगरेप और आर्मी ट्रेनी अफसरों से मारपीट मामले में पांच दोषियों को उम्रकैद
MP News: इंदौर जिले के महू में छह महीने पहले हुए सनसनीखेज गैंगरेप और आर्मी के ट्रेनी ऑफिसरों से मारपीट के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
सोमवार को चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश रवि शंकर दोहने ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि देश के रक्षक और एक महिला के साथ किया गया यह अपराध क्षम्य नहीं है। अदालत ने कहा कि ऐसे अपराधी समाज में रहने लायक नहीं हैं।

विशेष लोक अभियोजक संध्या उईके ने बताया कि इस मामले में दोष सिद्ध करने के लिए 32 गवाहों के बयान और आरोपियों की डीएनए रिपोर्ट अहम सबूत रहे। मामले में कुल छह आरोपी थे, जिनमें से एक नाबालिग है, जिसका केस बाल न्यायालय में विचाराधीन है।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 10 सितंबर 2024 की रात की है। महू के बड़गोंदा थाना क्षेत्र में स्थित जाम गेट के पास आर्मी की फायरिंग रेंज में दो ट्रेनी ऑफिसर अपनी महिला मित्रों के साथ कार में घूमने आए थे। रात करीब 2:30 बजे बदमाशों ने उन पर हमला कर दिया। लाठी-डंडों से लैस करीब 7 से 8 बदमाशों ने दोनों आर्मी ऑफिसरों को पीटकर बंधक बना लिया और महिलाओं से भी मारपीट की। बदमाशों ने 10 लाख रुपये की फिरौती मांगी और जान से मारने की धमकी दी।
बदमाशों ने एक ऑफिसर और महिला को रुपए लाने भेजा, लेकिन जब एक घंटे में वे नहीं लौटे, तो आरोपियों ने बंधक बनी युवती के साथ गैंगरेप किया और फरार हो गए। घटना के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया और बाकी की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाया।
डीएनए रिपोर्ट बनी सबसे बड़ा सबूत
पुलिस ने आरोपियों अनिल और रितेश के कपड़े, घटनास्थल से मिले बाल और खून के धब्बों को डीएनए जांच के लिए भेजा। जांच में पुष्टि हुई कि दोनों आरोपियों ने पीड़िता से दुष्कर्म किया था। पुलिस ने चार्जशीट में यह भी बताया कि आरोपियों ने घटना के बाद सबूत मिटाने का प्रयास किया था। पुलिस ने केस में सबूत नष्ट करने की धारा भी जोड़ी।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में छह महीने में हुआ फैसला
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने इसे फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने का निर्णय लिया। पुलिस ने महज एक महीने के भीतर ही चालान पेश कर दिया था। इसके बाद छह महीने में अदालत ने गवाही और सबूतों के आधार पर फैसला सुनाया और पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी।
मामले में शामिल एक आरोपी नाबालिग है, जिसका केस बाल न्यायालय में लंबित है। वहीं, पुलिस ने आरोपी रितेश के पास से एक देसी पिस्टल और जिंदा कारतूस भी बरामद किए।
न्यायालय का सख्त रुख
अदालत ने फैसले में कहा कि छावनी क्षेत्र में देश के रक्षकों और एक महिला के साथ जो हुआ, वह न सिर्फ अपराध है बल्कि पूरे समाज के लिए शर्मनाक भी है। ऐसे अपराधियों को सजा देना आवश्यक है ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी घिनौनी हरकत करने की हिम्मत न करे।
इस केस ने एक बार फिर महू और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, फास्ट ट्रैक कोर्ट में जल्दी सुनवाई और सख्त सजा से पीड़ित पक्ष ने भी राहत की सांस ली है।












Click it and Unblock the Notifications