MP News: विधानसभा में लागू होगा ड्रेस कोड, कर्मचारी पुरुषों के लिए पैंट-शर्ट, महिलाओं के लिए साड़ी अनिवार्य
मध्य प्रदेश विधानसभा में जल्द ही एक नया बदलाव देखने को मिलेगा। विधानसभा सचिवालय ने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एकसमान ड्रेस कोड लागू करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के तहत, विधानसभा में कार्यरत पुरुष कर्मचारी और अधिकारी अब पैंट-शर्ट या समर जैकेट और बंद गले के कोट में नजर आएंगे, जबकि महिला कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए साड़ी अनिवार्य होगी।
इस कदम का उद्देश्य विधानसभा के वेल ऑफ द हाउस में बैठने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच समानता लाना और एक पेशेवर माहौल बनाना है।

विधानसभा में ड्रेस कोड की जरूरत क्यों?
मध्य प्रदेश विधानसभा में अभी तक अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए कोई तय ड्रेस कोड नहीं था। विभिन्न विभागों के कर्मचारी और अधिकारी अपनी पसंद के अनुसार कपड़े पहनकर सदन में उपस्थित होते थे, जिसके कारण वेल ऑफ द हाउस में बैठने वाले कर्मचारियों के पहनावे में एकरूपता का अभाव दिखता था। विधानसभा सचिवालय ने इस असमानता को दूर करने और सदन की गरिमा को और बढ़ाने के लिए ड्रेस कोड लागू करने का निर्णय लिया।
विधानसभा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "सदन में एकरूपता और अनुशासन का माहौल बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। ड्रेस कोड लागू होने से न केवल कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच समानता आएगी, बल्कि विधानसभा की कार्यवाही में भी एक पेशेवर छवि दिखेगी।"
ड्रेस कोड का विवरण
नए ड्रेस कोड के तहत, पुरुष कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए पैंट-शर्ट को अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा, गर्मियों के लिए समर जैकेट और ठंड के मौसम के लिए बंद गले का कोट भी स्वीकृत किया गया है। महिलाओं के लिए साड़ी को अनिवार्य पोशाक के रूप में चुना गया है, जो भारतीय संस्कृति और परंपरा को दर्शाता है।
पुरुष कर्मचारी/अधिकारी: पैंट-शर्ट, समर जैकेट, और सर्दियों में बंद गले का कोट। रंग और डिजाइन को लेकर विधानसभा सचिवालय द्वारा दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे।
महिला कर्मचारी/अधिकारी: साड़ी, जिसका रंग और स्टाइल विधानसभा सचिवालय द्वारा तय किया जाएगा।
ड्रेस कोड लागू होने के बाद कर्मचारियों और अधिकारियों को विधानसभा सचिवालय द्वारा निर्धारित कपड़े ही पहनने होंगे। यह नियम वेल ऑफ द हाउस में बैठने वाले सभी कर्मचारियों और अधिकारियों पर लागू होगा।
MP assembly: ड्रेस कोड लागू करने की प्रक्रिया
विधानसभा सचिवालय ने ड्रेस कोड को लागू करने के लिए एक व्यापक योजना तैयार की है। सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों और अधिकारियों को नए ड्रेस कोड के अनुरूप कपड़े उपलब्ध कराने के लिए सचिवालय द्वारा एक विशेष बजट आवंटित किया जाएगा। कपड़ों की आपूर्ति के लिए एक अधिकृत वेंडर को नियुक्त किया जाएगा, जो यह सुनिश्चित करेगा कि सभी कर्मचारियों को एकसमान और गुणवत्तापूर्ण पोशाक मिले।
इसके अलावा, ड्रेस कोड के रंग, डिजाइन, और अन्य विवरणों को अंतिम रूप देने के लिए एक समिति का गठन किया गया है। यह समिति कर्मचारियों और अधिकारियों की राय लेने के बाद अंतिम दिशा-निर्देश जारी करेगी। कर्मचारियों को ड्रेस कोड का पालन करने के लिए एक निश्चित समयसीमा दी जाएगी, जिसके बाद यह नियम अनिवार्य रूप से लागू होगा।
MP assembly: कर्मचारियों और अधिकारियों की प्रतिक्रिया
ड्रेस कोड लागू करने के निर्णय को लेकर कर्मचारियों और अधिकारियों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ कर्मचारियों ने इस कदम का स्वागत किया है और इसे विधानसभा की गरिमा और अनुशासन को बढ़ाने वाला कदम बताया। एक कर्मचारी ने कहा, "ड्रेस कोड से हमें एक पेशेवर पहचान मिलेगी, और यह विधानसभा की कार्यवाही को और गरिमामय बनाएगा।"
वहीं, कुछ कर्मचारियों ने इस नियम को लेकर असुविधा जताई है। एक महिला कर्मचारी ने कहा, "साड़ी पहनना अच्छा है, लेकिन रोजाना इसे पहनना और मेंटेन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हमें कुछ अन्य विकल्प भी दिए जाने चाहिए।" कुछ पुरुष कर्मचारियों ने भी सवाल उठाया कि क्या गर्मियों में बंद गले का कोट पहनना व्यावहारिक होगा।
विधानसभा की गरिमा और एकरूपता पर जोर
मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा, "विधानसभा केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र का मंदिर है। यहां की कार्यवाही में अनुशासन और गरिमा का होना बहुत जरूरी है। ड्रेस कोड लागू करना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।"
इसके साथ ही, विधानसभा सचिवालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ड्रेस कोड लागू होने के बाद कर्मचारियों और अधिकारियों को नियमित रूप से इसकी निगरानी की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई भी की जा सकती है।
अन्य राज्यों में ड्रेस कोड की स्थिति
मध्य प्रदेश विधानसभा का यह निर्णय कई अन्य राज्यों की विधानसभाओं से प्रेरित माना जा रहा है, जहां पहले से ही कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए ड्रेस कोड लागू है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश विधानसभा में पुरुष कर्मचारियों के लिए सफारी सूट और महिलाओं के लिए साड़ी अनिवार्य है। मध्य प्रदेश का यह कदम भी इसी तरह की एकरूपता और पेशेवर माहौल को बढ़ावा देने की दिशा में देखा जा रहा है।
सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव
ड्रेस कोड में साड़ी को महिलाओं के लिए अनिवार्य करने का निर्णय भारतीय संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा देने वाला माना जा रहा है। हालांकि, कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि महिलाओं के लिए साड़ी के अलावा सलवार-कमीज जैसे अन्य पारंपरिक परिधानों को भी वैकल्पिक रूप से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों को अधिक सुविधा हो।












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