MP Election 2023: कांग्रेस प्रत्याशियों की पहली सूची में देरी, टिकट वितरण में दिखेगी सोशल इंजीनियरिंग की झलक
MP Congress News: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सबसे पहले प्रत्याशियों की सूची जारी करने की बात करने वाली कांग्रेस अब तक अपनी पहली सूची जारी नहीं कर सकी है। लेकिन बताया जा रहा है कि समाज के सभी वर्गों को साधने के लिए कांग्रेस सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला लागू करने जा रही है। कांग्रेस ने इसके लिए विभिन्न समाजों के अलग-अलग प्रकोष्ठ गठित किए है। यही नहीं कांग्रेस सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले के तहत हर समाज के प्रतिनिधि को टिकट देने का प्रयास कर रही है, इसीलिए अब तक पहली सूची जारी नहीं हो सकी।
पार्टी सूत्रों की माने तो अब तक हुए मंथन में कांग्रेस ने समाज और जातियों के आधार पर सभी को प्रतिनिधित्व यानी टिकट देने का रोड में तैयार कर लिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने विभिन्न समाज और जातियों के लोगों की जनसंख्या का अनुमान लगाने एजेंसी के जरिए सर्वे भी कराया है। इस टिकट का आधार बनाया जाएगा। 12 सितंबर को दिल्ली में स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक होगी।

इसी को देखते हुए आज राजधानी भोपाल के टीटी नगर दशहरा मैदान में आयोजित अखिल भारतीय युवा कुशवाह समाज के प्रांतीय सम्मेलन को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने संबोधित किया। नाथ ने कहा कि कुशवाहा समाज प्रदेश में बड़ी संख्या में निवास करता है। प्रदेश की भाजपा सरकार इस वर्ग की समस्याओं को नजर अंदाज कर उनके साथ अत्याचार और शोषण कर रही है। शिवराज सरकार में भ्रष्टाचार की एक ऐसी व्यवस्था बनी हुई है, जिससे हर वर्ग परेशान है, हर समाज के लोग परेशान हैं।
पूर्व IAS देवेंद्र कुमार राय को जिम्मेदारी
बता दे साल 2020 में कमलनाथ सरकार गिरने के बाद से कांग्रेस ने सामाजिक संगठनों, जाति आधारित संगठनों और उनके नेताओं को जोड़ने का काम प्रारंभ किया। पार्टी ने पूर्व IAS देवेंद्र कुमार राय को जिम्मेदारी सौंपी कि वे विलुप्त हो रही जनजातियों का अध्ययन कर उन्हें कांग्रेस के मंच पर लाएं। इसके बाद कांग्रेस ने विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, भारिया और सहरिया, कोरकू, भील भिलाला गोंड, कोल सहित कई जातियों के सम्मेलन किए। उनके लिए पार्टी संगठन में अलग-अलग से प्रकोष्ठ भी गठित किए गए हैं। दूसरे चरण में प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने का एक सर्वे भी कराया है।
किस जाति के प्रदेश में 10 लाख से अधिक मतदाता
पार्टी की रणनीति यह है कि किस जाति के प्रदेश में 10 लाख से अधिक मतदाता हैं, उस वर्ग के व्यक्ति को अनिवार्य रूप से टिकट दिया जाए। मध्य प्रदेश कांग्रेस और मोर्चा प्रकोष्ठ प्रभारी जेपी धनुपिया ने बताया कि मध्य प्रदेश कांग्रेस सोशल इंजीनियरिंग को लेकर गंभीर है। कमलनाथ ने समाजों के संगठन खड़े किए हैं। राजनीतिक तौर पर इनमें से कई समाजों को अब तक कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला, जबकि संख्या बल में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। इसी परिप्रेक्ष्य में पार्टी टिकट वितरण में इन समाजों को प्राथमिकता देगी।
टिकट वितरण का आधार बनेगा सर्वे
कमलनाथ द्वारा व्यक्तिगत स्तर पर कराए गए सर्वे से पार्टी को अंदाज लग गया है कि किस विधानसभा क्षेत्र में किस जाति के मतदाताओं की संख्या कितनी है इस आधार को अब पार्टी टिकट वितरण का आधार बनाएगी। बंजारा, रजक, कोली-कोरी, सिंधी, मसीह, बुनकर केश, शिल्पी, तेली, साहू, विश्वकर्मा, बंगाली सहित अन्य समाजों के प्रकोष्ठ बनाकर प्रदेश से लेकर जिला और तहसील तक संगठन खड़ा कर दिया है। पार्टी ने इसमें समन्वय बनाने के लिए समाज समन्वय प्रकोष्ठ भी बनाया है ताकि सभी जातियों के बीच समन्वय बनाए जा सके।












Click it and Unblock the Notifications