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गोमाता के गोबर से सजा दीपों का बाजार, पवित्र दीयों से रोशन होगी दीपावली

Deepawali 2022 के मौके पर सागर सहित बुंदेलखंड इलाके में गाय के गोबर से बने दीये बिक रहे हैं। दीये इतने कलरफुल और कलात्मक हैं कि इनके आगे चाइना से आने वाले दीपक, पश्चिम बंगाल के आधुनिक और फैंसी दीपक तक कमतर नजर आ रहे हैं। इन दीपकों को सागर की महिला स्वसहायता समूहों की महिलाओं ने तैयार किए हैं। इनके लिए विचार संस्था सामग्री उपलब्ध कराती है। तैयार दीयों को आकर्षक रुप से पैंकिंग कर इनके लिए संस्था ही बाजार उपलब्ध करा रही है। सागर की समाजसेवी विचार संस्था ने गोबर के दीपक से करीब 750 घरों की महिलाओं को रोजगार प्रदान कर उनकी दीपावली रोशन करा दी है।

दीपावली पर सागर में गोबर व सुगंधित, महकने वाले दीयों की बहार है।

दीपावली पर सागर में गोबर व सुगंधित, महकने वाले दीयों की बहार है।

दीपावली के मौके पर सागर के बाजार में इस साल अलग तरह के दीयों की बहार है। स्थानीय स्तर पर बने और गौ शालाओं से निकले गाय के गोबर व सुगंधित व महकने वाली सामग्री से निर्मित दीपक बाजार की रोनक बने हुए हैं। कटरा बाजार और तिलकगंज इलाके में ये दीपक उपलब्ध हैं। इन दीपकों को लेने के लिए लोगों में उत्साह है। ये दीपक फैंसी और कलात्मक दीयों की अपेक्षा सस्ते और किफायती भी पड़ रहे हैं। लोग इन्हें खूब पसंद कर हैं। बीती कुछ सालों में सागर में एक लघु उद्योग और लोगों को स्थानीय स्तर पर यह माल उपलब्ध कराया जा रहा है।

7 लाख से अधिक गोबर से बन दीये तैयार कराए गए हैं

7 लाख से अधिक गोबर से बन दीये तैयार कराए गए हैं

विचार संस्था के कपिल मलैया ने बताया कि इस साल अभी तक करीब 7 लाख दीपक बनाए गए हैं। इसमें तीन साइज के दीपक शामिल हैं, जिनमें दो लाख से अधिक छोटे दीया, गोल कटोरी नुमा 1 लाख से अधिक दीपक तथा बड़े दीपकों की संख्या करीब पौने पांच लाख है। कुल मिलाकर करीब 7 लाख दीपक बाजार में उपलब्ध कराए गए हैं।

करीब साढ़े सात सौ महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया

करीब साढ़े सात सौ महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया

कपिल मलैया के अनुसार गौ-शालाओं के गोबर से दीपक, धूप और अन्य इसी तरह के उत्पाद तैयार करने के लिए करीब 750 महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से इनको रोजगार दिया जा रहा है। समूहों की महिलाओं को गोबर के साथ मिट्टी का मिश्रण, रंग, ब्रश, सांचे सहित अन्य सभी सामग्री उपलब्ध कराई जाती है।

मिट्टी के दीपक भी लोगों को खूब भा रहे

मिट्टी के दीपक भी लोगों को खूब भा रहे

स्थानीय बाजार में देशी-विदेशी कारीगरों और कंपनियों के दीयों की भरमार है, बावजूद इसके लोग मिट्टी के दीयों को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। सागर व आसपास के ग्रामीणों क्षेत्रों में बने मिट्टी के प्लेन दीयों का बाजार भी खूब गुलजार हो रहा है। चाइना और पश्चिम बंगाल से आने वाले दीपक फैंसी व विभिन्न डिजाइनों में उपलब्ध तो हैं, लेकिन इनके दाम भी तगड़े हैं। इधर बाजार में इलेक्टिॉनिक्स आइटमों और सजावटी दीपक वाली लड़ भी मौजूद हैं, लेकिन लोगों में चाइन के माल को लेकर जागरुकता के चलते कम ही बिक्री हो रही है।

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