मलैया के आंगन में फिर पहुंची सरकार! विजयवर्गीय ने हाथ जोड़कर माफी मांगी
चुनावी साल के पहले ही भाजपा ने दमोह में डैमेज कंट्रोल कर लिया है। प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान से लेकर पूरी भाजपा ने दमोह में आयोजित कार्यक्रम में मलैया की तारीफ में कसीदे पढ़े।

बुंदेलखंड भाजपा एक बार फिर अपने कद्दावर पुराने साथी पूर्व मंत्री जयंत मलैया के साथ खड़ी नजर आने लगी है। दो साल से उपेक्षा झेल रहे मलैया के बाद दमोह में भाजपा अपनी जमीन खो चुकी थी। गुटबाजी और आपसी फूट में भाजपा यहां से साफ हो गई थी, अब चुनाव से पहले मलैया को मनाने और ससम्मान वापसी के लिए सरकार और संगठन बीते रोज दमोह में मौजूद था। सीएम ने जहां मलैया की जमकर तारीफ की तो कैलाश विजयवर्गीय ने भाजपा द्वारा मलैया को नोटिस देने को लेकर मंच से हाथ जोड़कर माफी मांगी।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने दमोह में मलैया के 75 वें जन्मदिन पर आयोजित अमृत महोत्सव के कार्यक्रम में मंच से कहा कि पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया को भाजपा ने नोटिस देकर भूल की थी। उन्होंने संगठन की तरफ से कहा कि मैं पार्टी के महासचिव के नाते माफी मांगता हूं। उन्होंने मंच से हाथ जोड़कर मलैया से मांफी भी मांगी। उन्होंने कहा कि मुझे जब मलैया को नोटिस की जानकारी लगी तो मेरा दिल दुखा। जयंत जी आप विश्वास करें या न करें... मैंने प्रदेश स्तर से लेकर दिल्ली तक यह बात रखी थी। प्रदेश के सब नेताओं से कहा कि यह बहुत गलत किया। उनके जैसे नेता को तैयार होने में दशकों लगते हैं।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि 75 वां जन्मदिन है तो लोग यह न समझे कि मलैया भाई रिटायर्ड हो रहे हैंं। मैं बता दूं कि मलैया कि बिना दमोह अधूरा है। उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी गई, उन्होंने बाखूबी निभाया है, उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है। आयोजन में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, केंद्रीय राज्यमंत्री व दमोह सांसद प्रहलाद पटेल, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, मप्र कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र सिंह, गोपाल भार्गव, तरुण भनोत व सागर विधायक शैलेंद्र जैन भी पहुंचे थे।
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मलैया के पॉवर में आने से सागर-दमोह तक असर पड़ेगा
बुंदेलखंड में पिछले विधानसभा चुनाव में मलैया की हार व कांग्रेस से जीते विधायक राहुल लोधी द्वारा भाजपा ज्वाइन करने और फिर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने और हारने के बाद मलैया पर आरोप लगाए थे। मलैया बैकफुट पर आ गए थे। उनको नोटिस दिए, पार्टी से गद्दारी तक के आरोप लगाए गए थे। बाद में उपेक्षित होकर उनके बेटे सिद्धार्थ मलैया ने पार्टी छोड़ दी थी। हालांकि जयंत मलैया ने कभी भाजपा का दामन नहीं छोड़ा था। सिद्धार्थ ने निकाय चुनाव में भाजपा का गणित बिगाड़ दिया था। अब अमृत महोत्सव के बहाने पार्टी ने मलैया गुट का पूर्ण रुप से साधने और दमोह में भाजपा को पुन: काबिज कराने का प्रयास शुरु कर दिया है। दमोह में मलैया के पॉवर में आने के बाद सागर की राजनीति तक इसका असर देखने को मिलेगा।












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