वैक्सीनेशन पॉलिसी पर पुनर्विचार करे केंद्र सरकार- मध्य प्रदेश हाई कोर्ट
जबलपुर, 26 मई: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने वैक्सीनेशन पॉलिसी पर स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार से कहा है कि वह इसपर पुनर्विचार करे। अदालत ने मंगलार को केंद्र से कहा कि वह राज्यों को विदेशों से वैक्सीन खरीदने के लिए कहने के बजाए यह काम खुद से करने पर विचार करे। अदालत ने मई महीने में मध्य प्रदेश को वैक्सीन के लिए किए गए वादे के मुताबिक डोज नहीं मिल पाने के बाद यह टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस अतुल श्रीधरण की बेंच ने केंद्र सरकार से कहा कि वह विदेशी निर्मातों से पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन की डोज खरीदे और राज्यों को खुद ही उपलब्ध करवाए, न कि यह भार उनपर डाल दे।

मध्य प्रदेश में वैक्सीन की किल्लत का मामला
दरअसल, राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि स्थानीय निर्माता वैक्सीन की आवश्यक डोज सप्लाई करने की स्थिति में नहीं है, इसलिए राज्य सरकार कोविड-19 वैक्सीन की 1 करोड़ सिंगल डोज ग्लोबल टेंडर के जरिए खरीदने की तैयारी कर रही है। इसपर वकील सिद्धार्थ गुप्ता ने अदालत के सामने यह बात रखी कि 1 करोड़ वैक्सीन डोज 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की 7.3 करोड़ आबादी को देखते हुए पर्याप्त नहीं होगी। इसपर कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि उसे ग्लोबल टेंडर के जरिए खरीदी जाने वाली डोज की संख्या बढ़ानी होगी, क्योंकि हर व्यक्ति को 2 डोज की जरूरत देखते हुए यह संख्या कम पड़ेगी। इसपर एमिकस क्यूरी नमन नाथ ने अदालत को बताया कि कई राज्यों ने विदेशों से वैक्सीन खरीदने के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किए हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में वैक्सीन निर्माताओं से सकारत्मक जवाब नहीं मिल रहा है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि पिछले 15 अप्रैल को सेंट्रल ड्रग्स एंड स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने जो आदेश जारी किया है, उससे भी विदेशी निर्माताओं का राज्यों के साथ सीधे डील करने में अड़चन आ सकती है। क्योंकि, उसमें बाहरी निर्माताओं के लिए सरकार ने कई पाबंदियां लगा रखी हैं।
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केंद्र वैक्सीन खरीदे और राज्यों को उपलब्ध करवाए- हाई कोर्ट
इसके बाद अदालत ने कहा कि, 'विभिन्न राज्यों की ओर से जारी ग्लोबल टेंडर भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने में नाकाम रहे हैं। बहुत ज्यादा संदेह खड़े किए गए है कि क्या इन प्रयासों से प्रदेश में आने वाले महीनों में पर्याप्त संख्या में वैक्सीनेशन डोज उपलब्ध हो पाएंगे।' इसीलिए अदालत ने केंद्र सरकार से ही यह जिम्मेदारी निभाकर उसे राज्यों को उपलब्ध करवाने पर विचार करने को कहा है। अदालत ने एडवोकेट जनरल पुरुषेंद्र कौरव के जवाब पर कहा कि अगर टाइमलाइन के हिसाब से केंद्र सरकार और स्थानीय निर्माताओं की ओर से आवश्यक संख्या में वैक्सीन की डोज की सप्लाई नहीं की जाएगी तो लोगों को 2022 के जनवरी तक टीका लगाने का लक्ष्य हासिल करना बहुत मुश्किल होगा।












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