MP News: मध्य प्रदेश में सोयाबीन समर्थन मूल्य को लेकर भारतीय किसान संघ का 16 सितम्बर को होगा बड़ा आंदोलन
मध्य प्रदेश में सोयाबीन के समर्थन मूल्य को लेकर किसानों और सरकार के बीच तनातनी जारी है। प्रदेश सरकार ने हाल ही में सोयाबीन की खरीद के लिए 4892 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य की दर पर प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
हालांकि, किसान संगठनों ने इस मूल्य को अपर्याप्त मानते हुए 6000 रुपए प्रति क्विंटल की मांग की है। इस मांग को लेकर किसान संगठनों ने प्रदेशव्यापी आंदोलन की रणनीति तैयार की है।

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सरकार ने सोयाबीन की खरीदी की तारीख भी घोषित कर दी है। खरीदी प्रक्रिया 25 अक्टूबर से शुरू होकर 31 दिसंबर 2024 तक चलेगी। इस दौरान किसानों को रजिस्ट्रेशन करवाने का अवसर मिलेगा, जो कि 25 सितंबर से 15 अक्टूबर तक उपलब्ध रहेगा। यह रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया किसानों के लिए महत्वपूर्ण है ताकि वे निर्धारित समय पर अपनी फसल बेच सकें और समर्थन मूल्य का लाभ उठा सकें।
16 सितंबर को एक बड़ा आंदोलन होगा
भारतीय किसान संघ के मालवा प्रांत अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण पटेल ने सरकार के तय किए गए समर्थन मूल्य पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा है कि "जो राशि सरकार ने तय की है, वो मूल्य आयोग ने पहले ही तय कर रखा है। हम चाहते हैं कि सोयाबीन के लिए 6000 रुपए का रेट मिलना चाहिए।" आंजना ने आगे बताया कि इसके लिए 16 सितंबर को एक बड़ा आंदोलन होगा। इस आंदोलन के तहत जिला स्तर पर प्रदर्शन, चक्काजाम, और अन्य प्रदर्शनात्मक गतिविधियां की जाएंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने किसानों की मांग को नहीं माना, तो आगे के संघर्ष को लेकर किसी भी प्रकार की कार्रवाई की जा सकती है।
कांग्रेस पार्टी ने भी किसानों की 6000 रुपए प्रति क्विंटल की मांग का समर्थन किया है। कांग्रेस के नेता ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाने की बात की है, ताकि किसानों की उचित मांगों को पूरा किया जा सके।
फिलहाल, मध्य प्रदेश में सोयाबीन की खरीदारी की प्रक्रिया और किसानों की समर्थन मूल्य की मांग के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। यह देखना होगा कि क्या सरकार किसान संगठनों की मांगों को पूरा करती है या आंदोलन की राह पर चलने की स्थिति उत्पन्न होती है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रदर्शन की रणनीति की घोषणा की
भोपाल के एमएलए रेस्ट हाउस में गुरुवार को आयोजित संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक ने आगामी दिनों के लिए व्यापक आंदोलन की रणनीति तैयार की है। इस बैठक में, संयुक्त किसान मोर्चा एमपी के प्रभारी डॉ. सुनीलम् ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा देश के 550 किसान संगठनों का एक साझा मंच है, जिसमें मध्यप्रदेश के 25 किसान संगठन भी शामिल हैं।
मुख्य मुद्दे और निर्णय
बैठक में सोयाबीन, धान, मक्का, कपास और आलू के समर्थन मूल्य को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। किसानों की प्रमुख मांगें, जैसे कि समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी और एमएसपी को C2 प्लस 50% के हिसाब से तय कराने की जरूरत पर जोर दिया गया।
प्रदर्शन की योजना
20 से 27 सितंबर तक धरने: इस दौरान, संयुक्त किसान मोर्चा एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी और एमएसपी को C2 प्लस 50% के आधार पर तय कराने के लिए जिलों में धरना देगा। यह आंदोलन सरकार को किसानों की वास्तविक मांगों की ओर ध्यान देने के लिए प्रेरित करने का प्रयास करेगा।
28 सितंबर को कॉर्पोरेट विरोधी दिवस: इस दिन, शहीद भगत सिंह की जयंती के अवसर पर, संयुक्त किसान मोर्चा पूरे प्रदेश में सभी जिलों में किसानों की मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपेगा और भगत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करेगा। इस दिन को कॉर्पोरेट विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाएगा, जो किसानों की समस्याओं को उजागर करने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
30 सितंबर को भोपाल में धरना: 30 सितंबर को, भोपाल में एक दिवसीय धरना आयोजित किया जाएगा, जो समर्थन मूल्य के मुद्दे पर केंद्रित होगा। इस धरने के माध्यम से किसानों की आवाज को सरकार तक पहुंचाने और उनकी मांगों को गंभीरता से लेने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की जाएगी।
आंदोलन का उद्देश्य
संयुक्त किसान मोर्चा का उद्देश्य किसानों की मांगों को सरकार तक पहुंचाना और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए उचित कदम उठाने के लिए सरकार को मजबूर करना है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया, तो आगे की कार्रवाई के लिए योजना तैयार है।
इस प्रकार, संयुक्त किसान मोर्चा के इस व्यापक आंदोलन की योजना सरकार और आम जनता के सामने किसानों के मुद्दों को स्पष्ट रूप से रखेगी और समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हो सकती है।












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