MP News: भारतीय किसान संघ ने सोयाबीन एमएसपी और अन्य मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन, कांग्रेस ने उठाए सवाल

मध्य प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक किसान अपने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को 6 हजार रुपए क्विंटल करने की मांग को लेकर सक्रिय हो गए हैं। सोमवार को भारतीय किसान संघ (BKS) ने प्रदेश भर में रैलियां आयोजित कीं और कलेक्टर कार्यालयों में ज्ञापन सौंपे।

इस प्रदर्शन ने राज्य की राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में हलचल पैदा कर दी है, और कांग्रेस ने भारतीय किसान संघ के प्रदर्शन पर सवाल उठाए हैं।

Bharatiya Kisan Union submitted memorandum regarding soybean MSP other demands Congress questions

कांग्रेस ने भारतीय किसान संघ के प्रदर्शन पर उठाए सवाल

कांग्रेस पार्टी ने भारतीय किसान संघ के प्रदर्शन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के मीडिया एडवाइजर केके मिश्रा ने कहा, "भारतीय किसान संघ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ब्रांच है और इसका गठन भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है। प्रदेश भर के किसान कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में प्रदर्शन और आंदोलन कर रहे हैं। इसीलिए, भारतीय किसान संघ का प्रदर्शन एक साजिश का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हमारे आंदोलन को कमजोर करना है।"

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मिश्रा ने यह भी कहा, "जब मध्यप्रदेश में किसान का बेटा मुख्यमंत्री था और उसने किसानों पर गोली चलवाई, जिसके परिणामस्वरूप 6 किसान शहीद हो गए, तब वह अब देश का कृषि मंत्री है। इस स्थिति में, इन्हें छोटे और बड़े तालाबों में डूब मरना चाहिए। कांग्रेस का प्रभावी आंदोलन सरकार को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए किसान संघ का प्रदर्शन केवल सरकारी गुलामी की मानसिकता को दर्शाता है।"

भारतीय किसान संघ का जवाब: हमारा आंदोलन गैर-राजनैतिक

भारतीय किसान संघ के प्रचार प्रमुख ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, "राजनीतिक दलों का स्वभाव होता है कि जब कोई अच्छा काम होता है, तो वे उसका राजनीतिकरण करने की कोशिश करते हैं। भारतीय किसान संघ एक गैर-राजनैतिक संगठन है जो हमेशा किसानों के अधिकारों के लिए लड़ता रहा है। चाहे वह बीमा का मामला हो, मुआवजे का मुद्दा हो, या गेहूं का दाम 2700 रुपए क्विंटल करने की मांग हो, किसान संघ हमेशा अग्रणी रहा है।"

उन्होंने आगे कहा, "यह वही स्थिति है कि हम जो मुद्दा उठाते हैं, उसे राजनीतिक दल अपने तरीके से पेश करते हैं। अगर कांग्रेस भी किसानों के हक में खड़ी होती है और किसान बनकर उनकी लड़ाई लड़ती है, तो हम उनका स्वागत करते हैं।"

किसानों की स्थिति और उनकी मांग

मध्य प्रदेश में सोयाबीन किसानों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है। वर्तमान में सोयाबीन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर किसानों की असंतोषजनक प्रतिक्रिया इस बात को दर्शाती है कि वे अपने अधिकारों और फसलों के उचित मूल्य के लिए संघर्षरत हैं। किसानों का कहना है कि 6 हजार रुपए क्विंटल का एमएसपी उनके लिए फसलों की लागत और मेहनत के मुकाबले न्यायपूर्ण मूल्य होगा।

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भोपाल में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा: भारतीय किसान संघ ने की बड़ी मांग

भोपाल में भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष गिरधर सिंह राजपूत के नेतृत्व में किसानों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को 6 हजार रुपए प्रति क्विंटल करने, येलो मोजेक के कारण खराब हुई फसलों का मुआवजा दिलाने और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देने की मांग की गई है।

भोपाल के किसानों की मुख्य मांगें

  • सोयाबीन का एमएसपी 6 हजार रुपए प्रति क्विंटल किया जाए: किसानों ने सोयाबीन के लिए 6 हजार रुपए प्रति क्विंटल का एमएसपी सुनिश्चित करने की मांग की है, जिससे उनकी फसलों की लागत और मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।
  • येलो मोजेक के कारण फसलों की क्षति का मुआवजा: जिले में येलो मोजेक की बीमारी के कारण सोयाबीन की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। किसानों ने मांग की है कि आरबीसी 6/4 के तहत सर्वे कराकर इन फसलों की क्षतिपूर्ति राशि दी जाए।
  • फसल बीमा लाभ: भोपाल जिले के किसानों को फसल बीमा का लाभ प्रदान किया जाए, जिससे नुकसान की स्थिति में उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
  • बासमती धान का समर्थन मूल्य 4000 रुपए प्रति क्विंटल किया जाए: किसानों ने बासमती धान के एमएसपी को 4000 रुपए प्रति क्विंटल करने की मांग की है।
  • नजीराबाद को पूर्ण तहसील बनाया जाए: नजीराबाद क्षेत्र को पूर्ण तहसील का दर्जा देने की मांग भी की गई है, जिससे प्रशासनिक सेवाएं और सुविधाएं बेहतर हो सकें।
  • पार्वती नदी पर डैम परियोजना और रेसई परियोजना: नजीराबाद और बैरसिया क्षेत्रों के लिए सिंचाई हेतु पानी प्रदान करने के लिए पार्वती नदी पर डैम परियोजना और रेसई परियोजना की मांग की गई है।
  • गेहूं के एमएसपी की घोषणा: प्रदेश सरकार ने अपने घोषणा पत्र में गेहूं को 2700 रुपए प्रति क्विंटल खरीदने की घोषणा की थी। किसानों ने अगले सीजन में इसी दर पर गेहूं की खरीदारी सुनिश्चित करने की मांग की है।

सरकार की तैयारी: 4892 रुपए प्रति क्विंटल की दर से सोयाबीन की MSP पर खरीदी
राज्य सरकार ने किसानों के बढ़ते आंदोलन को देखते हुए सोयाबीन की एमएसपी पर 4892 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदी कराने की तैयारी की है। 25 सितंबर से किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हालांकि, किसान सरकार की इस एमएसपी दर से संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने अपने मुद्दों को लेकर और अधिक समर्थन और उचित कार्रवाई की मांग की है।

भोपाल में किसानों की यह पहल और उनकी मांगें इस बात को दर्शाती हैं कि वे अपने अधिकारों और फसलों की उचित मूल्य की प्राप्ति के लिए लगातार संघर्षरत हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इन मांगों पर किस तरह की कार्रवाई करती है और किसानों के मुद्दों का समाधान कैसे निकालती है।

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