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Swami Swaroopanand Saraswati: दोनों पीठ के नामित उत्तराधिकारियों की हुई घोषणा, जानें कौन बने नए शंकराचार्य...

नरसिंहपुर, 12 सितंबर: ज्योतिष और द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद उत्तराधिकारी कौन होगा? समाधि कार्यक्रम के पूर्व उन नामों का ऐलान कर दिया गया। हालांकि संत परंपरा के अनुसार पहले ही उत्तराधिकारी नामित कर दिए जाते हैं, जीवित रहते हुए उन नामों को गोपनीय रखा जाता है। स्वरूपानंद महाराज ने अपने दो शिष्य सदानंद और अविमुक्तेश्वरानंद को दंडी स्वामी परंपरा के अनुसार दीक्षा दी थी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ और स्वामी सदानंद को द्वारका शारदा पीठ का प्रमुख घोषित किया गया।

इस तरह हुआ सुयोग्य पात्र शंकराचार्य का निर्धारण

इस तरह हुआ सुयोग्य पात्र शंकराचार्य का निर्धारण

सनातन धर्म की संत परंपरा में उत्तराधिकारी निर्धारण के विशेष नियम है। जीवनकाल के दौरान उत्तराधिकारी नामित करने का विधान है। दो पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती भी दोनों पीठ के लिए अपना उत्तराधिकारी नामित कर चुके थे। लगभग पांच वर्ष पूर्व इस बात की जानकारी उन्होंने हरिद्वार में मीडिया से सांझा की थी। स्वरूपानंदजी ने भी दंडी स्वामी की दीक्षा ली थी, बाद में उत्तराधिकारी के रूप में शंकराचार्य हुए। इसी तरह उन्होंने अपने दो शिष्य सदानंद और अविमुक्तेश्वरानंद को दंडी स्वामी की शिक्षा दी। ब्रह्मलीन होने के बाद नामित उत्तराधिकारी का निर्धारण काशी विद्वत परिषद के साथ देश के बड़े संत अखाड़ा और बाकी दो पीठ के शंकराचार्य की बैठक में नाम की अधिकृत घोषणा की गई।

एक पीठ में दो शंकराचार्य धर्म विरुद्ध

एक पीठ में दो शंकराचार्य धर्म विरुद्ध

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती दो पीठ के शंकराचार्य रहे। उनके निधन के बाद ज्योतिष और द्वारका-शारदा पीठ के उत्तराधिकारी का चयन हुआ। सुयोग्य पात्र दंडी स्वामी शिष्य को चारों पीठ का शंकराचार्य बनाया जा सकता है, लेकिन किसी एक पीठ में एक से अधिक शंकराचार्य होना, विधान के खिलाफ माना जाता हैं। स्वामी स्वरूपानंद महाराज भी यही कहते थे।

सदानंद सरस्वती वरिष्ठ और पुराने शिष्य

सदानंद सरस्वती वरिष्ठ और पुराने शिष्य

मप्र के नरसिंहपुर जिले में जन्मे दंडी स्वामी सदानंद का मूल नाम रमेश अवस्थी था। धर्म के प्रति लगाव, उन्हें शंकराचार्य आश्रम खींच लाया। जब उनकी उम्र 18 वर्ष थी, तो उन्होंने ब्रह्मचारी दीक्षा ग्रहण की। उसके बाद वह ब्रह्मचारी सदानंद हो गए। वाराणसी में स्वामी स्वरूपानंद से उन्होंने दंडी दीक्षा ली। बाद में उन्हें गुजरात के द्वारका शारदापीठ में शंकराचार्य के प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया गया।

दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ के रहने वाले उमाकांत पांडे के छात्र जीवन में अचानक एक ऐसा पड़ाव आया, जब उनका मन धार्मिकता की तरफ डोला। उनके कदम शंकराचार्य आश्रम की ओर बढ़े और उन्होंने भी ब्रह्मचारी दीक्षा ले ली। जिसके बाद उनका नाम ब्रह्मचारी आनंद स्वरूप हो गया। उन्हें भी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने दंडी दीक्षा दी, जिसके बाद वह दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बन गए। वर्तमान में यह बद्रिकाश्रम में शंकराचार्य के प्रतिनधि का दायित्व संभाल रहे हैं।

स्वामी सुबुधानंद सरस्वती

स्वामी सुबुधानंद सरस्वती

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने जब अपने उत्तराधिकारी नामित किए थे, तो उनके अनुयायियों की भी यह जिज्ञासा थी कि आखिर उत्तराधिकारी किसे नामित किया गया है? हरिद्वार में मीडिया के ऐसे ही सवाल पर उन्होंने कहा था कि दोनों पीठों पर मेरे उत्तराधिकारी मेरी सेवा में हैं । शंकराचार्य पद के अनुरूप आचरण की दीक्षा ले रहे हैं। जब समय आएगा तो उनका प्रकटोत्सव हो जाएगा। वही स्वामी सुबुधानंद सरस्वती के नाम की भी चर्चा में रहा। वह स्वरूपानंदजी के निज सचिव का दायित्व संभालते आ रहे थे।

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