MP News: आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा पर उठाए सवाल, जानिए कैसे हो रहा है भेदभाव
MP Anganwadi worker News: मध्य प्रदेश महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित की जा रही है, जिसमें 660 महिला पर्यवेक्षक पद शामिल हैं। लेकिन इस भर्ती प्रक्रिया पर प्रदेशभर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि सरकार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए भर्ती में अलग और कम नियम तय किए हैं, जो भेदभावपूर्ण हैं।

क्या है समस्या?
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सरकार ने उन्हें केवल 45 वर्ष तक आवेदन की अनुमति दी है, जबकि सिर्फ 1400 संविदा सुपरवाइजर को 15 साल अधिक छूट दी गई है। यानी, ये महिलाएं 55 वर्ष तक आवेदन कर सकती हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह भेदभावपूर्ण है और इस प्रक्रिया में गड़बड़ी की संभावना है। उनका सवाल है कि एक भर्ती में दो नियम क्यों?
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का विरोध
प्रदेशभर में 1.80 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं, और उन्होंने इस भर्ती में समान अवसर की मांग की है। इन कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी समान अवसर देना चाहिए। दरअसल, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की थी, जिसमें कोर्ट ने आदेश दिया था कि मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी भर्ती में बराबर का अधिकार दिया जाए।
महिला एवं बाल विकास विभाग का बयान
इस बारे में महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक राजेश प्रताप सिंह ने कहा कि उन्होंने अभी तक कोर्ट के आदेश को नहीं देखा है और भर्ती प्रक्रिया नियमानुसार चल रही है। उन्होंने कहा, "इससे अधिक मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता।"
क्या हो सकती है आगे की प्रक्रिया
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के सवालों के बाद इस मामले पर और ध्यान दिया जा सकता है। यदि कोर्ट के आदेश के अनुसार मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी समान अवसर नहीं मिलते, तो यह मामला और जटिल हो सकता है।आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का यह विरोध समान अधिकारों और अवसरों के लिए है, और उन्होंने समान नियमों की मांग की है, जिससे उन्हें भी भर्ती प्रक्रिया में समान अवसर मिल सके।
क्या है विवाद?
विभाग के द्वारा जारी किए गए नियमों के मुताबिक, सीधी भर्ती के तहत आवेदन करने वाले सामान्य उम्मीदवारों के लिए आयु सीमा 18 से 40 वर्ष तक निर्धारित की गई थी। वहीं, एससी, एसटी, ओबीसी, शासकीय कर्मचारी, नगर सैनिक, नि:शक्तजन और महिलाओं को 5 वर्ष की छूट दी गई। लेकिन सबसे विवादास्पद बात यह रही कि संविदा कर्मियों के लिए नियम में बदलाव किया गया और उन्हें 55 वर्ष तक की छूट दे दी गई।
संविदा कर्मियों के लिए यह छूट उनके काम करने के सालों के आधार पर दी जाएगी। उदाहरण के लिए, अगर कोई संविदा कर्मी एक या अधिक पदों पर काम कर चुका है, तो उसे उतने ही वर्षों की छूट मिलेगी, और यह छूट अधिकतम 55 वर्ष तक दी जा सकती है।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का विरोध
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता संगठनों ने इस भेदभाव पर कड़ी आपत्ति जताई है। आंगनवाड़ी संघ की महामंत्री रंजना राणा ने कहा, "यह नियम नियमित काम करने वालों से भेदभाव करने जैसा है। जबकि संविदा पर काम करने वालों को 55 साल तक की छूट दी जा रही है, वहीं हम आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सिर्फ 45 साल तक की छूट दी जा रही है। यह कैसे न्यायसंगत है?"
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब संविदा कर्मियों को इतने अधिक वर्ष की छूट दी जा सकती है, तो उन्हें भी समान अवसर मिलना चाहिए। इस असमानता के कारण आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई है, और उन्होंने इस मामले को महिला एवं बाल विकास विभाग और हाईकोर्ट तक पहुंचाने की योजना बनाई है।
आगे क्या हो सकता है?
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध और हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के बाद इस मुद्दे पर और भी कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही हो सकती है। विभाग ने अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है, लेकिन यदि यह मामला अदालत में जाता है तो भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की संभावना हो सकती है।












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