मथुरा हिंसा- अपने ही बुने जाल में फंसी यूपी पुलिस

लखनऊ। मथुरा में जवाहर बाग में जिस तरह से अवैध कब्जा हटाने गयी पुलिस पर हमला हुआ है उसने यूपी पुलिस पर कई सवाल खड़े कर दिये हैं। इस अभियान से पहले कई ऐसे सवाल खड़े हो गये हैं जिसका जवाब देना यूपी पुलिस के लिए मुश्किल हो रहा है।

जवाहर बाग में यूएस मेड रॉकेट लॉचर भी थे मौजूद, पुलिस रिपोर्ट में खुलासा

UP Police fail to answer tough questions on Mathura clash

जिस वक्त जवाहर बाग का ऑपरेशन शुरु होने जा रहा था उस समय यहां के एसएसपी राकेश सिंह ने इस ऑपरेशन के लिए रैपिड एक्शन फोर्स की मांग की थी। इस ऑपरेशन से पहले प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पंडा और डीजीपी जावीद अहमद ने अधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग भी की थी।

इस कांफ्रेंसिंग में डीजीपी ने आरएएफ मुहैया कराने में असमर्थता जतायी थी। यही नहीं इस ऑपरेशन के लिए दो कंपनी महिला पुलिस बल की भी मांग की गयी थी। लेकिन इन सब जरूरतों के अभाव में यह ऑपरेशन शुरु किया गया था।

जवाहर बाग को खाली कराने के लिए हाई कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिये थे जिसके बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया था। इस ऑपरेशन के लिए तीन बार प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी ने अधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग की थी।तीसरी बार की गयी वीडियो कांफ्रेंसिग में एसएसपी ने इस ऑपरेशन को तीन जून को किये जाने को कहा था लेकिन आगरा के कमिश्नर इसे तीन या चार जून को ही शुरु कराने के इच्छुक थे।

लेकिन इन तारीखों से पहले ही यह ऑपरेशन शुरु किया गया, जिसमें दो पुलिस वाले शहीद हो गये। वहीं इस ऑपरेशन की तारीख पर सवाल उठने पर डीजीपी का कहना है कि दो जून को पुलिस सिर्फ रेकी करने गयी थी। लेकिन डीजीपी की यह सफाई इसलिए गले नहीं उतरती है क्योंकि पुलिस वर्दी में रेकी करने गयी थी। यही नहीं रेकी के दौरान जवाहर बाग की दीवार को क्यो तोड़ा गया, ये ऐसे सवाल हैं जिसका जवाब देने से पुलिस कतरा रही है।

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