मायावती पर बरसी सपा, बोली जनता के पैसों से बढायी अपनी माया
लखनऊ। बसपा के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्या के पार्टी छोड़ने के बाद जिस तरह से मायावती ने सपा पर जमकर हमला बोला उसका जवाब देने के लिए राजेंद्र चौधरी आगे आये हैं। राजेन्द्र चौधरी ने कहा है कि बसपा अध्यक्ष की आदत अपनी कमजोरियों के लिए दूसरों को दोषी ठहराने की रही है। उनकी पार्टी में गहराते अंसतोष का कारण उनका भ्रष्टाचार प्रेम है जिसके चलते पिछली बसपा सरकार में तमाम घोटाले हुए थे।
माया लोभी मायावती करती हैं टिकटों की नीलामी: पासवान

जितनी अंधेरगर्दी बसपा राज में रही, उसकी कभी कल्पना भी नही की गई थी। जनता ने इसीलिए बसपा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। चौधरी ने कहा कि बसपा अध्यक्ष को समाजवादी पार्टी से विशेष एलर्जी है क्योंकि यह संघर्ष की पार्टी है। परिवारवाद का वहाँ कोई स्थान नही है।
इसमें नेतृत्व संघर्ष से उभरता है। बसपा में इसके विपरीत परिवारवाद किस तरह तरह हावी है, इसका उदाहरण स्वयं बसपा अध्यक्ष का परिवार है। उनका परिवार संपत्ति बटोरने में आगे हैं। उन्होने आज अपनी प्रेस कांफ्रेस में भी माना है कि उन्होंने पार्टी में परिवारवाद को स्वयं संरक्षण दिया था।
स्वामी प्रसाद पर मायावती बोली यह परिवारवाद के चक्कर में गया है
बसपा प्रमुख को याद रहे कि जनता को गुमराह करने में उन्हें सफलता मिलने वाली नही है। लोगो ने देखा है कि किस तरह बसपा राज में झूठ और लूट का साम्राज्य था। गरीब की कही भी सुनवाई नही थी। वैसे वो भी मानती है कि उनको माया की कमी नही है।
सच तो यह है कि उनकी पूरी राजनीति ही मायाग्रस्त है। बसपा अकेला दल है जहाँ चुनावों में टिकटों की बोली लगती है। इस दल में चुनाव घोषणा पत्र जारी नही होता है। मतलब उनकी जनता के प्रति कोई जवाबदेही नही है। वह तो दलितों को भी वोट बैंक मानती है।
लोकतंत्र में जिन मूल्यों को लेकर राजनीति की अपेक्षा की जाती है, बसपा नेता को उनकी कोई परवाह नही है। वे तो सत्ता को अपने स्वार्थ साधन की सीढ़ी मानती है। जितना दुरुपयोग उन्होने सरकारी खजाने का किया है, उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। समाजवादी पार्टी की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने घोषणा की थी कि अब जनता के धन का उपयोग जनता के कामों में ही होगा।
उन्होंने जनहित की योजनांए लागू की है जिनसे समाज का हर वर्ग लाभान्वित है। बसपा राज में तो पत्थरों, पार्केा, स्मारकों पर ही जनता की गाढ़ी कमाई लुटाई गई थी। इसलिए बसपा प्रमुख को मालूम है कि जनता का रुझान समाजवादी पार्टी की ओर है। वे इससे कुंठित और हताश होकर समाजवादी पार्टी पर झूठे आरोप लगा रही है। यह ओछी मानसिकता निंदनीय है।












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