मुलायम को मुस्लिम वोट खोने का डर या मायावी वोटबैंक पर डाका

जी हां अब समाजवादी पार्टी ने प्रदेश के अति पिछड़ी जातियों के लोगों पर डालने शुरू कर दिये हैं। इसी के तहत 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जातियों में शामिल करने की मांग को लेकर सपा सामाजिक न्याय और अधिकार रथ यात्रा का तीसरा चरण पांच जनवरी से शुरू कर रही है।
यूपी में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार एंव रथयात्रा के संयोजक गायत्री प्रसाद प्रजापति के अनुसार पांच जनवरी से ये रथयात्रा उन्नाव जिले से शुरू होकर कानपुर, जालौन, हमीरपुर, बांदा और महोबा होते हुए झांसी पहुंचेगी जहां 11 जनवरी को पार्टी द्वारा आयोजित 'देश बचाओ देश बनाओ' रैली में शामिल होगी। इससे पहले ये रथयात्रा दो चरणों में पिछले वर्ष अक्टूबर और नवंबर में पूर्वाचल के विभिन्न जिलों में निकाली जा चुकी है।
प्रजापति ने कहा कि इन 17 अति पिछड़ी जातियों (कश्यप, निषाद, बिंद, मल्लाह, कहार, कुम्हार, धीवर, राजभर, प्रजापति, भर, बाथम, तुरहा, गौड़, मांझी, धीमर मछुआ और केवट) की आर्थिक और सामाजिक हालत दलितों से भी बदतर है। सपा सरकार ने मार्च 2012 में विधानसभा के दोनों सदनों में इन 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का प्रस्ताव पारित कराकर केंद्र सरकार को भेजा था लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक कोई कार्यवाही नहीं की। उन्होंने कहा कि सपा की मांग है कि कांग्रेसनीत केंद्र सरकार इन अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करके उन्हें हक दिलाए और भाजपा व बहुजन समाज पार्टी (बसपा) इसमें सहयोग करें। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्र सरकार ये कदम नहीं उठाती, सपा का आंदोलन जारी रहेगा।
जरा सोचिये आज से दो साल पहले तक सपा ने कभी भी इन अति पिछड़े लोगों के बारे में बात तक नहीं की। यूपी में सत्ता मिली, तो भी अखिलेश यादव की सरकार ने इन अति पिछड़ी जातियों के लिये किसी खास योजना का ऐलान नहीं किया अब जब लोकसभा चुनाव करीब है, तब वोटबैंक की खातिर मुलायम के लिये ये जातियां बेहद खास हो गई हैं। खैर वर्तमान राजनीतिक हालात तो यही कह रहे हैं कि लोकसभा चुनाव में उन नेताओं को वोट नहीं मिलने वाला, जो जाति-धर्म के नाम पर वोट मांगेंगे, वोट उसे ही मिलेगा जो आम आदमी से जुड़ा होगा और जो विकास की बात करेगा।












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