विकास दुबे की मां ने कहा- नहीं देखूंगी बेटे की शक्ल, जो किया वो गलत किया
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में गुरुवार की देर रात दबिश देने गई पुलिस टीम पर पहले से घात लगाकर बैठे विकास दुबे गैंग ने हमला बोल दिया था। इस हमले में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए। जबकि सात पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। आठ पुलिसकर्मियों की शाहदत के बाद विकास दुबे और उसके साथियों की धर-पकड़ तेज हो गई हैं। वहीं, विकास दुबे की मां ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'पुलिस के कातिल, बेटे का चेहरा नहीं देखूंगी। उसने जो किया वो गलत किया।'
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क्या कहा विकास दुबे की मां ने...
विकास दुबे के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। इसी सिलसिले में पुलिस की एक टीम लखनऊ स्थित कृष्णा नगर पहुंची। दरअसल, विकास दुबे की मां अपने छोटे बेटे के साथ यहीं रहती हैं। विकास की मां के घर के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। साथ ही विकास के भाई की पत्नी, बेटी और मां से पूछताछ की। विकास की मां ने बताया कि मैं अपने बेटे (विकास दुबे) की शक्ल तक नहीं देखूंगी। उसने जो किया है वो बहुत ज्या गलत है। पुलिस उसका एनकाउंटर कर दे।'

मामा और चचेरे भाई मुठभेड़ में ढेर
शुक्रावार की सुबह विकरू के जंगलों में पुलिस की दुबे गैंग से मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ में पुलिस ने विकास दुबे के मामा प्रेम प्रकाश पांडेय और चचेरे भाई अतुल दुबे को मार गिराया। साथ ही पुसिस ने बदमाशों के पास से पुलिस से लूटे हथियार भी बरामद किए हैं। इस मुठभेड़ में तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए है। वहीं काशीराम निवादा गांव के पास जंगल में तीन बदमाशों के छिपे होने पर मुठभेड़ जारी है। पुलिस ने इस दौरान विकास दुबे का एक साथी को हिरासत में भी लिया है।

आसपास जिलों की सीमाएं सील
पुलिस ने कानपुर मंडल के कानपुर, कानपुर देहात, कन्नौज, फर्रुखाबाद, इटावा, औरैया की सभी सीमाएं सील कर दी हैं। जीटी रोड पर स्थित गांव में हुई घटना के बाद से जीटी रोड पर जगह-जगह बैरियर लगाकर हो रही है संघन तलाशी ली गई। वहीं फॉरेंसिंक टीमें भी घटनास्थल पर जांच पड़ताल के लिए पहुंची है। अपराधी विकास के घर को चारों तरफ पुलिस तैनात कर दिया गया है।

इस घटना के बाद से कहलाता था वो शिवली का डॉन
हिस्टीशीटर विकास दुबे की अगर बात करे तो उसका एक लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। 19 साल पहले उसने साल 2001 में विकास दुबे ने थाने के अंदर घुसकर राजनाथ सिंह सरकार में राज्यमंत्री रहे संतोष शुक्ला की हत्या कर दी थी। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर के बाद उसने कोर्ट में सरेंडर कर दिया और कुछ माह के बाद जमानत पर बाहर आ गया था। बताया जाता है कि थाने में घुसकर राज्यमंत्री की हत्या का आरोप लगने के बावजूद भी उसका कुछ नहीं हुआ। इतनी बड़ी वारदात होने के बाद भी किसी पुलिसवाले ने विकास के खिलाफ गवाही नहीं दी। जिसके बाद उसे छोड़ दिया गया। इसी घटना के बाद वो 'शिवाली का डॉन' नाम से मशहूर हो गया था।












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