मिलिए सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों के पीछे के उस हीरो से जिसका जुनून है कैमरा

अंकुर सिंह। सड़क किनारे कड़ी धूप में अपनी हड्डि़यों को गलाकर खुद की रोजी-रोटी कमाने वालों को आपने अक्सर देखा होगा और उनके ऊपर पुलिस का सितम कोई नयी बात नहीं है। लेकिन सड़क किनारे टाइपराइटर से रोजाना 50 रुपए कमाने वाले बुजुर्ग कृष्ण कुमार की आवाज को उठाने वाले आशुतोष त्रिपाठी इस कड़ी में एक नयी इबारत लिखते हैं।

हाल ही में 65 वर्षीय बुजुर्ग टाइपिस्ट कृष्ण कुमार पर उत्तर प्रदेश पुलिस की बर्बरता की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई। लेकिन इन तस्वीरों के पीछे एक नौजवान फोटोग्राफर आशुतोष त्रिपाठी का लेंस है जोकि ऑनलाइन न्यूज पोर्टल दैनिक भाष्कर में कार्यरत हैं।

जब एक मौके ने बदल दी जिंदगी

आशुतोष ने पत्रकारिता की दुनिया में तकरीबन 4 साल पहले बतौर रिपोर्टर कदम रखा था लेकिन उनकी हमेशा से ही तस्वीरों के माध्यम से लोगों की समस्याओं को उठाना जुनून था। अपने इसी जुनून को हकीकत की जमीन पर उतारने के लिए उन्हें आखिरकार एक बड़े न्यूज पेपर नवभारत टाइम्स में बतौर छायाकार मौका मिला।

इस बड़े मौके के बाद आशुतोष ने कभी भी पलट कर नहीं देखा। अपने जुनून के लिए आशुतोष सड़कों पर कड़ी धूप में भटकते रहे और हर उस विषय को अपने लेंस के जरिये लोगों के बीच रखने की कोशिश की जो कि जनसरोकार से जुड़े थे। मौजूदा वक्त में आशुतोष दैनिक भाष्कर में मुख्य फोटोग्राफर के तौर पर लखनऊ में कार्यरत हैं।

जब उस दोपहर ने बदल दी जिंदगी

टाइपिस्ट कृष्ण कुमार की सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों के बारे मं आशुतोष कहते हैं कि यह दिन भी उनके लिए सामान्य दिन की तरह था। वह विधानसभा के पास चाय की चुस्कियां ले रहे थे तभी दारोगा के यहां चाय बेचने वाले दुकानदार के दूध के डिब्बे को पैरों से मारकर गिरा दिया।

उस वक्त मैंने अपना कैमरा निकाला और तस्वीरें खींचनी शुरु कर दी मुझे इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह दारोगा बुजुर्ग कृष्ण कुमार के टाइपराइटर को भी पैरों से मारकर तोड़ देगा। बुजुर्ग दारोगा के सामने गिड़गिड़ाता रहा लेकिन दारोगा की हनक में कोई भी कमी नहीं आयी। हालांकि दारोगा ने मुझे तस्वीरों को डिलीट करने को कहा लेकिन मुझे पता था कि इन तस्वीरों से इस बुजुर्ग के दर्द को आवाज मिल सकती है।

सोशल मीडिया एक बड़ी ताकत है

जब मैं इन तस्वीरों को लेकर अपने ऑफिस पहुंचा तो मेरे टीम लीड को इस बात का अंदाजा लग गया था कि ये तस्वीरें क्या कर सकती हैं। इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर डालने के बाद बुजुर्ग को उनका हक और इंसाफ मिला। मेरे लिए यह एक खास पल था लोग मुझे दुनियाभर में जानने लगे हैं। फेसबुक पर मेरे पास हजारों की संख्या फ्रैंड रिक्वेस्ट आ रही है।

बिल्कुल मेरे लिए यह काफी खास है कि इस पल को मैं सहेजकर रखूं और लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरूं। मैं हमेशा इस बात की कोशिश करुंगा कि लोग मुझे मेरे काम के लिए याद रखे और सतत अपने प्रयासों को जारू रखूं। कैमरा मेरा हमेशा से जुनून रहा है और अब मैं इस जुनून को हर पल जीना चाहता हूं।

लेंस नहीं हथियार हैं ये

लेंस नहीं हथियार हैं ये

आशुतोष कैमरे के लेंस को सिर्फ लेंस नहीं बल्कि हथियार मानते हैं।

डीएम और एसएसपी ने किया सम्मानित

डीएम और एसएसपी ने किया सम्मानित

डीएम और एसएसपी ने किया सम्मानित

आरोपी दारोगा

आरोपी दारोगा

इस दारोगा की दबंगई के चलते हुए यूपी पुलिस की किरकिरी।

दारोगा की दबंगई ने किसी पर नहीं दिखाया रहम

दारोगा की दबंगई ने किसी पर नहीं दिखाया रहम

वर्दी के नशे में चूर दारोगा ने चायवालों के दूध के कैन को भी सड़क पर फेंक दिया।

जो कर सकते हो कर लो मेरा

जो कर सकते हो कर लो मेरा

वर्दी की हनक में दारोगा ने कहा एक तस्वीर अच्छी खींच लो और हर जगह छाप देना।

बिखरा आशियाना

बिखरा आशियाना

बुजुर्ग कृष्ण कुमार का टूटा टाइपराइटर।

अपनी रोजी-रोटी को बटोरता बुजुर्ग

अपनी रोजी-रोटी को बटोरता बुजुर्ग

बुजुर्ग कृष्ण कुमार अपने टूटे टाइपराइटर को समेटते हुए।

डीएम एसएसपी ने बुजुर्ग को दिया नया टाइपराइटर

डीएम एसएसपी ने बुजुर्ग को दिया नया टाइपराइटर

तस्वीरों के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बुजुर्ग को मिला नया टाईपराइटर।

मिलिये लखनऊ के रीयल हीरो विशाल सिंह से

मिलिये लखनऊ के रीयल हीरो विशाल सिंह से

मिलिये लखनऊ के रीयल हीरो विशाल सिंह से

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