20 नहीं, इस बार 19 अप्रैल को महावीर जयंती की छुट्टी
जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर महावीर स्वामी के जन्म उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला पर्व इस बार 20 अप्रैल के बजाए 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। जिसके कारण उत्तर प्रदेश शासन द्वारा विचारविमर्श के बाद 19 तारीख को अवकाश घोषित किया गया है।

क्यों हुआ बदलाव!
लखनऊ के जैन धर्म प्रवर्धनीय के सभापति द्वारा अवगत कराया गया कि इस बार महावीर जयंती का पर्व 20-4-2016 को नहीं बल्कि 19-4-201616 को मनाया जाएगा।
आईये जानते हैं महावीर स्वामी के कुछ उपदेशों को.....
1- माना जाता है कि भगवान महावीर ने जन्म लेकर जीवों को अहिंसा, स्याद्वाद और अपरिग्रह का संदेश दिया। सत्य और अहिंसा जैसे महान सिद्धान्त तो सामान्यतः सत्पुरुषों की श्रेणी में आने वाले सभी मनुष्यों में देखे जा सकते हैं।
2- महावीर की अहिंसा बहुत सूक्ष्म है। उनके विचारों में जीवों की रक्षा कर लेना मात्र अहिंसा नहीं है किसी भी प्राणी को तकलीफ नहीं पहुंचाना मात्र अहिंसा नहीं है।
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निश्चित तौर सवाल उठता है कि आखिर क्या है अहिंसा? और हिंसा के मायने क्या हैं? कहीं न कहीं महावीर स्वामी ने इन तमाम बातों को बेहद लघु रूपों में भी सीमित किया है। या कहें आम जिंदगी का, रोज मर्रा का हिस्सा जैसा अनुभूत कराया।
3- यदि किसी को हमारी मदद की आवश्यकता है और हम उसकी मदद करने में सक्षम भी हैं फिर भी हम उसकी सहायता न करें तो यह भी हिंसा है। जरूरतमंद की सहायता करना अहिंसा धर्म है। किसी की जान बचाने के लिए अहिंसक प्राणी अथवा प्रेम से भरा हुआ प्राणी अपनी जान भी दे देता है। इस तरह की उत्तम वृत्ति मनुष्यों में ही नहीं पशुओं में भी देखी जा सकती है।












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