लखनऊः 25 स्कूलों में एक साथ नौकरी करने वाली शिक्षिका मामले में योगी सरकार सख्त, EOW कर सकती है जांच
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 25 स्कूलों में एक साथ काम करने वाली अनामिका शुक्ला कि गिरफ्तारी के बाद भी असली गुनहगार को लेकर आशंकाओं से घिरी हुई है। वहीं इस पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी राज्य सरकार यूपी पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को सौंप सकती है। प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने कहा कि उन्हें अभी यह नहीं मालूम है कि इस मामले में जो शिक्षिका पकड़ी गई है वही असली गुनहगार है या नहीं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी और विभाग की संलिप्तता इस मामले में नजर आई तो हम अपराध शाखा जैसी बाहर की एजेंसियों के जरिये गहन जांच करवाएंगे।

न्यूज 18 से बात करते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने कहा, 'अभी जो कासगंज में पकड़ी गई है वह तो अपना नाम अनामिका सिंह बता रही है। हमको कोई पत्रकार बता रहा था कि बागपत के बड़ौत में जहां अनामिका शुक्ला की मूल पोस्टिंग मानी जा रही थी वहां किसी प्रिया जाटव का नाम आ रहा है। ऐसा लग रहा है कि जिसका कागजात है वो मेधावी रहा होगा, उसका जगह-जगह इस्तेमाल करके लड़कियों ने नौकरी हासिल की है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के 25 कस्तूरबा गांधी स्कूलों में एक ही शिक्षिका द्वारा नौकरी किए जाने और 13 महीने के अंदर लगभग एक करोड़ रुपए वेतन हासिल करने का मामला सामने आया था। जिसके बाद शनिवार को कासगंज जिले में अनामिका सिंह नामक एक शिक्षिका को गिरफ्तार किया गया था। अनामिका गिरफ्तारी के डर से बीएसए कार्यालय अपना इस्तीफा देने आयी थी और उसी समय पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के अनुसार आरोपी अनामिका ने पूछताछ में बताया कि वह जनपद फर्रुखाबाद के कायमगंज की रहने वाली है और एक लाख की रिश्वत की बदौलत उसे नौकरी प्राप्त हुई थी। 25 जिलों में एक साथ नौकरी करने वाली शिक्षिका अनामिका शुक्ला को लेकर नए-नए खुलासे हो रहे है। दरअसल, शनिवार को काजगंज जिले की सोरों पुलिस ने अनामिका शुक्ला को गिरफ्तार करने का दावा किया था, लेकिन पुलिस पूछताछ में पता चला है कि उसका नाम अनामिका शुक्ला नहीं बल्कि प्रिया जाटव है। वो अनामिका शुक्ला के दस्तावेजों पर नौकरी कर रही थी।












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