यूपी में कल्याण सिंह की फिर हो सकती है दस्तक, राम मंदिर अभियान को मिलेगी धार
लखनऊ। अयोध्या विध्वंश में जिस तरह से तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया और पार्टी को राम मंदिर का ऐसा चुनावी मुद्दा मिला जिसने यूपी में काफी हद तक भाजपा को मजबूती प्रदान की। कल्याण सिंह की धांकड़ छवि को देखते हुए पार्टी में एक बार फिर से यूपी में उनकी वापसी पर चर्चा तेज हो गयी है।
उत्तर प्रदेश में किसी से गठबंधन नहीं करेगी भाजपा

आंनद बाजार पत्रिका में छपी खबर के मुतााबिक हिंदूवादी छवि के लिए जाने जाने वाले कल्याण सिंह को यूपी के चुनावी दंगल में उतारकर पार्टी ना सिर्फ उनकी हिंदूवादी छवि को भुनाना चाहती है बल्कि पिछड़ी जाति के वोटों को अपनी ओर करने की भी योजना बना रही है। यूपी में भाजपा अभी भी मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरे की तलाश कर रही है ऐसे में कई नामों पर चर्चा तेज है।
अमित शाह के बयान पर यूपी में छिड़ी जुबानी जंग
अलीगढ़ के भाजपा नेता कल्याण सिंह की बड़े नेताओं से पैरवी कर रहे हैं तो यूपी में भी कल्याण सिंह के लिए लॉबिंग तेज हो गयी है। उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की पार्टी में आवाज भी तेज होने लगी है। भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष मनोज भी मानते हैं कि कल्याण सिंह प्रदेश के बेहतर सीएम रह चुके हैं। इसके अलावा कई ऐसे नेता हैं जो मानते हैं कि कल्याण सिंह को उम्मीदवार बनाये जाने से पार्टी को काफी लाभ होगा।
कल्याण सिंह 1991 में पहली बार यूपी के मुख्यमंत्री बने. उन्होंने दो बार यूपी की कमान संभालते हुए यूपी में भाजपा की नींव को मजबूत किया। 1997 में वह दोबारा मुख्यमंत्री बने थे लेकिन इसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन छोड़ दिया था।
वर्ष 2004 में फिर से भाजपा से जुड़े और 2004 में उन्होंने बुलंदशहर से लोकसभा चुनाव लड़ा तो 2009 में वह एटा की लोकसभा सीट से निर्दलीय सांसद चुने गये। 4 सितंबर को उन्हें राजस्थान का राज्यपाल नियुक्त किया गया, मौजूदा समय में वह हिमचल प्रदेश के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाल रहे है।












Click it and Unblock the Notifications