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यूपी में साल दर साल घटी प्रजनन दर, गर्भनिरोधक का भी बढ़ा उपयोग, फिर क्यों लाई गई नई पॉलिसी, जानें

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने राज्य की वर्तमान प्रजनन दर को 2.7 से साल 2026 तक 2.1 तक लाकर जनसंख्या को स्थिर करने के उद्देश्य से एक नई नीति जारी की है।

लखनऊ, 11 जुलाई। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने राज्य की वर्तमान प्रजनन दर को 2.7 से साल 2026 तक 2.1 तक लाकर जनसंख्या को स्थिर करने के उद्देश्य से एक नई नीति जारी की है। इसी बीच न्यूज-18 ने यूपी की जनसंख्या को लेकर एक विश्लेषण किया है, जिसके मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश की प्रजनन दर में लगातार गिरावट देखी जा रही है।

up population control bill

उत्तर प्रदेश की प्रजनन दर (एक महिला से उसके प्रजनन वर्षों में पैदा हुए बच्चों की औसत संख्या) जो साल 1999 में 4.06 थी, वह 2016 में घटकर (बीते 17 सालों में) 2.7 रह गई है, जबकि इसी दौरान भारत की प्रजनन दर मात्र 0.7 प्रतिशत घटी है।

उत्तर प्रदेश सरकार की नई पॉलिसी के अनुसार सरकार का उद्देश्य साल 2026 तक 2.1 प्रजनन दर के लक्ष्य को हासिल करना है। जबकि 2030 तक प्रजनन दर को 1.9 प्रतिशत तक लाना है। किसी क्षेत्र में जनसंख्या स्थिर रहने के लिए, कुल प्रजनन दर का 2.1 होना आवश्यक है।

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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के मुताबिक साल 2015-16 में उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों की प्रजनन दर 3.0 थी, जबकि शहरी क्षेत्र में 2.1 प्रतिशत थी। 2006 से 2016 के बीच राज्य की कुल प्रजनन दर में प्रति महिला 1.1 बच्चों की गिरावट आई थी। 2005-06 में राज्य की कुल प्रजनन दर 3.8 थी। जिसमें शहरी क्षेत्रों में यह 2.95 थी, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में यह 4.13 थी।

1998-99 में, यूपी की कुल प्रजनन दर 4.06 थी। राज्य के शहरी हिस्सों में टीएफआर (कुल प्रजनन दर) 2.91 था जबकि ग्रामीण इलाकों में यह 4.39 था। भारत में अब तक NFHS के चार दौर (1992-93, 1998-99, 2005-06, 2015-16) पूरे हो चुके हैं जबकि पांचवां दौर (2019-20) अभी भी चल रहा है।

अशिक्षित महिलाओं में प्रजनन दर ज्यादा

आंकड़ों के अनुसार शिक्षित महिलाओं की अपने अशिक्षित महिलाओं ने ज्यादा बच्चों को जन्म दिया। NFHS-4(2015-16) के अनुसार अशिक्षित महिलाओं में प्रजनन दर जहां 3.5 रही, वहीं जिन महिलाओं ने 12 या इससे अधिक वर्षों तक स्कूल में शिक्षा ली ऐसी महिलाओं की प्रजनन दर 1.9 रही। यानि शिक्षित महिलाओं में प्रजनन दर में काफी सुधार देखा गया।

यूपी में गर्भनिरोधक की प्रसार दर में भी हुई वृद्धि

साल दर साल विवाहित महिलाओं में गर्भनिरोधक प्रसार दर में भी वृद्धि देखने को मिली है। साल 2016 में यह 46 प्रतिशत थी, जोकि 1999 से 1.5 गुना ज्यादा थी। साल 1999 में गर्भनिरोधक प्रसार दर 27 प्रतिशत थी। हालांकि गर्भनिरोधक प्रसार दर शहरी क्षेत्र के मुकाबले काफी कम है।

वर्तमान में आधुनिक परिवार नियोजन विधियों का उपयोग (32 प्रतिशत) हो गया है जोकि NFHS-3 में 29 प्रतिशत था। गर्भनिरोध के रूप में महिला नसबंदी NFHS-3-4 में अपरिवर्तित रही। वहीं शिक्षित महिलाएं गर्भनिरोधक के रूप में आधुनिक तरीकों को ज्यादा अपना रही हैं। वहीं एक मजेदार आंकड़ा यह भी है कि अशिक्षित महिलाओं में नसबंदी कराने की दर जहां 22 प्रतिशत है वहीं 12वीं तक की पढ़ाई करने वाली महिलाओं में नसबंदी की दर महज 7 प्रतिशत है।

वहीं, जिन महिला के पास पहले से ही बेटा है, उनमें गर्भनिरोध का उपयोग करने की संभावना अधिक है। NFHS-4 एक अनुसार जिन महिलाओं के दो बच्चे होते हैं और उनमें से यदि एक बेटा है तो ऐसी 54 प्रतिशत महिलाएं परिवार नियोजन के उपायों को अपनाती हैं, जबकि जिन महिलाओं के पास दोनों बच्चे लड़की के रूप में हैं उनमें से केवल 34 प्रतिशत महिलाएं ही परिवार नियोजन के उपाय अपनाती हैं।

गर्भनिरोधक प्रसार दर में गौतमबुद्ध नगर शीर्ष पर

अगल जिलेवार बात करें तो यूपी के गौतमबुद्ध नगर में गर्भनिरोधक प्रसार दर सबसे ज्यादा 75 प्रतिशत है, जबकि गाजियाबाद, झांसी, मेरठ, बरेली, आगरा में यह 60 प्रतिशत से ऊपर है। जबकि बलरामपुर में गर्भनिरोधक प्रसार दर सबसे कम 2.7 प्रतिशत है। गौंडा, बहराइच, श्रावस्ती में गर्भनिरोधक प्रसार दर 15 प्रतिशत है।

गर्भनिरोधक प्रसार दर को लेकर क्या कहते हैं पुरुष

रिपोर्ट में एक बेहद ही दिलचस्प आंकड़ा सामने आया है जिसके मुताबिक प्रदेश के 15-49 की आयु के 38 प्रतिशत पुरुष मानते हैं कि गर्भनिरोधक अपनाना केवल महिलाओं का काम है, पुरुषों को इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है।

1999 के बाद भारत की प्रजनन दर 0.7 गिरी

भारत की प्रजनन दर 1998-99 में 2.9 थी जो 2015-16 में 2.2 रह गई। इस दौरान ज्यादातर राज्यों में प्रजनन दर घटी है। NFHS-4 के मुताबिक बिहार को छोड़कर , सभही सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में टीएफआर दर 3.0 से नीचे थी। जहां 2016 में बिहार का टीएफआर रेट 3.4 था वहीं, 2020 में यह 3.0 रह गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार साल 1951 में भारत का टीएफआर 6 था।

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