उम्रकैद काट रहे बड़कऊ के मददगार पर गिरी गाज, दो जजों को बम से उड़ाने की दी थी धमकी
बड़कऊ एक बार पुलिस की गिरफ्त से भागने की कोशिश भी कर चुका है। शुरुआती जांच में फतेहपुर के एक कैदी पर पत्र भिजवाने का शक गहरा रहा है। आमतौर पर कैदी से हर हफ्ते मिलने के लिए मुलाकाती आते हैं।
बरेली। केंद्रीय जेल से दो जजों को जान से मारने की धमकी देने के सनसनी मामले में जेल प्रशासन ने बड़कऊ के मददगारों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक पीएन पांडेय ने शुरुआत कार्यवाही में सिपाही जगत नारायण शुक्ला को बड़कऊ की मदद करने के आरोप में ससपेंड कर दिया है साथ ही तीन अन्य सिपाहियों की भूमिका को शक के दायरे में रखते हुए विभागीय जांच बैठा दी है।

बताया यह भी जा रहा है कि बड़कऊ बड़े शातिर किस्म का अपराधी है। वह बहराइच जिले से सटे किसी अन्य जेल में शिफ्ट होकर सजा काटना चाहता है। बड़कऊ एक बार पुलिस की गिरफ्त से भागने की कोशिश भी कर चुका है। शुरुआती जांच में फतेहपुर के एक कैदी पर पत्र भिजवाने का शक गहरा रहा है। आमतौर पर कैदी से हर हफ्ते मिलने के लिए मुलाकाती आते हैं।
जिला जज को लिखा पत्र 13 दिसंबर 2016 को फतेहपुर के पोस्ट ऑफिस से डिस्पैच हुआ है। फतेहपुर से कनेक्शन जुड़ने के चलते यह शक जताया जा रहा है। बड़कऊ खुद शुगर का मरीज है। सेंट्रल जेल के डॉक्टर नेमचंद से उसकी बनती नहीं है। यही वजह है कि उसने पत्र में रंगदारी की रकम डॉक्टर को देने के लिए लिखा है। बड़कऊ डॉक्टर के खिलाफ कैदियों को गलत दवा देने का आरोप भी लगाया चुका है।

क्या था पूरा मामला
बड़काऊ ने बहराइच की जिला जज और गोंडा के अपर जिला जज से 20 लाख रुपए की पत्र भेजकर रंगदारी मांगी थी। रंगदारी नहीं मिलने की स्थिति में दोनों को जजों को कोर्ट परिसर में गाड़ी सहित उड़ाने की धमकी दी है। पत्र में लिखा है कि फिरौती की रकम राजकुमार की गैरमौजूदगी में बरेली जिला जेल के चिकित्सक डाक्टर नेमचन्द्र को दे दी जाये। वहीं जिला जेल में बड़काऊ से तलाशी में तीन धमकी भरे पत्र मिले हैं। बड़काऊ से मिले पत्रों में एक पत्र यूपी कैबिनेट मंत्री यासिर शाह के नाम भी था। इस पत्र में यासिर के ऊपर उत्पीडन का आरोप लगाते हुए जान से मारने की धमकी दी है












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