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बिहार का इनामी डकैत पुलिस से बचकर लखनऊ रेलवे स्टेशन पर बेच रहा चाय

लखनऊ। अपराध की दुनिया जिसका बोलबाला हो, वह चाय वाला बनकर चाय बेच रहा हो, क्या ऐसा संभव है। लखनऊ रेलवे स्टेशन के एक रेस्टोरेंट में गोपालगंज का इनामी डकैत अखिलेश पुलिस की निगाहों से बचकर चाय बेच रहा था। मगर वांछित बदमाशों को पकड़ने के अभियान के चलते वह ज्यादा दिन खुद को नकली पहचान के पीछे छुपा नहीं सका। अदालत में जाकर उसने खुद ही आत्मसर्मण कर दिया। लेकिन अहम है कि स्टेशन पर सीआरपीएफ के कडे़ पहरे के बावजूद डकैत पुलिस की निगाह से कैसे बचा रहा।

prize gunman

डीएसपी कैंट ने बताया कि अखिलेश बिहार के चर्चित घनश्याम गिरोह का सदस्या था। घनश्याम व अखिलेश साथियों के साथ मिलकर वाराणसी-बिहार मार्ग पर ट्रकों की लूट करते थे। घनश्याम को बिहार में ही एक ट्रक वाले ने उस समय उड़ा दिया था, जब वह उसे लूटने की कोशिश कर रहा था। गिरोह का एक और बदमाश भी मारा जा चुका है, जबकि अखिलेश और सुनील की गोरखपुर, बिहार और बनारस पुलिस को लंबे समय से तलाश थी।

वांछित बदमाशों को पकड़ने के अभियान के तहत शिवपुर थानाध्यक्ष अमित सिंह को डकैत की सूचना मिली थी। उन्हें पता चला था कि तीन वर्ष पूर्व शुद्धिपुर इलाके में हुई डकैती में शामिल अखिलेश पाठक निवासी गोपालगंज (बिहार) व उसका भाई लखनऊ में चारबाग स्टेशन स्थित एक रेस्त्रां में काम करता है।

जानकारी के अनुसार, पुलिस के पहुंचने के पहले अखिलेश फरार हो गया, लेकिन पुलिस ने उसके भाई रिकू को हिरासत में ले लिया और आत्म समर्पण के लिए उस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। शिवपुर पुलिस के दबाव में मंगलवार को वह वाराणसी में एसीजेएम (छह) की अदालत में हाजिर हो गया।

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