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घायल पिता को साइकिल पर बैठाकर 15 साल की बेटी ने तय किया 1200 KM का सफर, अखिलेश ने किया 1 लाख रु देने का ऐलान

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लखनऊ। लॉकडाउन के बीच 15 वर्षीय बेटी अपने घायल पिता को साइकिल पर बैठाकर 1200 किलोमीटर का सफर तय कर घर पहुंची। कोरोना लॉकडाउन के कारण उन्हें कोई वाहन नहीं मिला था। ऐसे में लड़की ने गुरुग्राम से बिहार तक का रास्ता खुद सा​इकिल से तय क‍िया। करीब एक हफ्ते तक पिता को साइकिल पर पीछे बैठाकर लड़की बिहार के दरभंगा पहुंची। इस लड़की के हौसले और साहस को सलाम करते हुए यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक लाख रुपए की मदद का ऐलान किया है।

अखिलेश ने कही ये बात

अखिलेश ने कही ये बात

अखिलेश यादव ने गुरुवार को साइकिल चलाती हुई लड़की की फोटो ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा, ''सरकार से हारकर एक 15 वर्षीय लड़की निकल पड़ी है अपने घायल पिता को लेकर सैकड़ों मील के सफ़र पर...दिल्ली से दरभंगा। आज देश की हर नारी और हम सब उसके साथ हैं। हम उसके साहस का अभिनंदन करते हुए उस तक 1 लाख रु. की मदद पहुंचाएंगे।'' बता दें, 15 साल की इस लड़की का नाम ज्योति कुमारी है। ज्योति ने बताया था, पिता मोहन पासवान के घायल होने की वजह से उसने खुद ही इतनी लंबी दूरी तक साइकिल चलाई। वह अभी 7वीं क्लास में पढ़ती है। ज्योति ने बताया कि सफर के दौरान डर लगता था कि कहीं पीछे से कोई गाड़ी टक्कर न मार दे। हां, रात के समय हाईवे पर साइकिल चलाते हुए डर नहीं लगा, क्योंकि सैकड़ों प्रवासी मजदूर भी सड़क से गुजर रहे थे। लेकिन किसी गाड़ी से टक्कर होने को लेकर चिंतित थी।

16 मई को अपने गांव पहुंची थी लड़की

16 मई को अपने गांव पहुंची थी लड़की

एक हफ्ते में 1200 किलोमीटर का सफर तय करने वाली ज्योति सा​इकिल से 10 मई को गुरुग्राम से निकली थी। दिन-रात साइकिल चलाते हुए वह 16 मई को अपने गांव पहुंची। इस यात्रा के लिए 500 रुपए में साइकिल खरीदी। एक ट्रक ड्राइवर ने दरभंगा पहुंचाने के लिए हमसे 6 हजार रुपये मांगे, जो हम देने में समर्थ नहीं थे। पापा पहले गुरुग्राम में ई-रिक्शा चलाते थे, लेकिन लॉकडाउन के बाद उन्हें ई-रिक्शा अपने मालिक के पास जमा करना पड़ा। इसी दौरान उन्हें पैर में चोट भी लग गई।

खत्म हो गए थे पैसे, मकान मालिक घर खाली करने का बना रहा था दबाव

खत्म हो गए थे पैसे, मकान मालिक घर खाली करने का बना रहा था दबाव

दरभंगा में अपने गांव पहुंचने के बाद पिता-पुत्री को क्वांरटाइन किया गया है। ज्योति घर पर क्वारंटाइन है, जबकि पिता को क्वारंटाइन सेंटर ले जाया गया है। ज्योति का कहना है कि पापा के पास पैसे नहीं बचे थे। मकान मालिक पैसे देने या फिर घर खाली करने के लिए दबाव बना रहे थे। इस वजह से हमने साइकिल से ही घर लौटने का फैसला लिया।

घायल पिता को साइकिल पर बिठाकर गुरुग्राम से 1200 KM दूर बिहार पहुंची 7वीं की छात्रा

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English summary
akhilesh yadav announced rs 1 lakh to girl who travelled 1200 km from cycle during lockdown
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