Parwan Project in Rajasthan : परवन प्रोजेक्ट में लोहे की जगह प्लास्टिक के पाइप बिछाकर 700 करोड़ का घोटाला
कोटा, 29 अक्टूबर। राजस्थान के कोटा, झालावाड़ और बारां को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करवाने के मकसद से शुरू हुए परवन प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। परवन सिंचाई परियोजना में अफसरों में गड़गड़ कर डाली। लोहे की जगह प्लास्टिक पाइप बिछवा दिए, जिससे प्रोजेक्ट का काम कर रही ठेकेदार कंपनी को करीब सात सौ करोड़ का लाभ पहुंचा दिया।

मंत्री व विधायकों की शिकायत पर मामला उजागर होने पर राजस्थान सरकार ने गुरुवार को जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता राजीव चौधरी, अधीक्षण अभियंता कृष्ण मोहन जायसवाल और अधिशाषी अभियंता शिव शंकर मित्तल को सस्पेंड कर दिया गया है।
बता दें कि खान मंत्री प्रमोद जैन भाया, कांग्रेस विधायक पाना चंद मेघवाल व निर्मला सहरिया ने सीएम अशोक गहलोत से शिकायत कर आरोप लगाया कि अफसरों और इंजीनियरों ने डिजाइन बदलकर ठेकेदार को सात सौ करोड़ रुपए का लाभ पहुंचाया है।

मीडिया से बातचीत में खान मंत्री प्रमोद जैन भाया ने बताया कि सेंट्रल वाटर कमिशन ने जो डिजाइन अनुमोदित किया था, उसे अफसरों ने बदल दिया। इससे 700 करोड़ तक घोटाले की आशंका है। मैं और दो विधायकों ने सीएम अशोक गहलोत से शिकायत सही पाई गई है। यदि एक्शन नहीं होता है तो यह प्रोजेक्ट बर्बाद हो जाता।
क्या है परवन प्रोजेक्ट राजस्थान?
- राजस्थान में मध्य प्रदेश की सीमा से लगते कोटा, झालावाड़ व बारां जिले में परवन प्रोजेक्ट चल रहा है।
- परवन परियोजना के तहत परवन नदी पर बांध और 8.7 किमी लंबी टनल बनाई जानी है।
- परवन सिंचाई परियोजना की 7000 रुपए है।

- डीपीआर के अनुसार बांध क्षेत्र में लोहे की पाइप लाइन बिछाई जानी थी। अफसरों ने इसे बदलकर पीबीसी यानी प्लास्टिक की पाइप लाइन बिछा दी।
- यहीं नहीं बल्कि डीपीआर में पाइप की जो चौड़ाई तय थी। उसे कम करके बिछाया जा रहा है।
- प्रमोद जैन भाया की शिकायत के बाद भी ग्राउंड पर ढाई सौ करोड़ की पाइप लाइन बिछाई गई।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार जल संसाधन सचिव डॉ. पृथ्वीराज ने बताया कि चीफ इंजीनियर सहित तीन इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है। वित्त विभाग की आडिट कमेटी से जांच करवाई जा रही है। वहीं, तत्कालीन प्रमुख सचिव जल संसाधन नवीन महाजन कहते हैं कि डिजाइन को एमएनआईटी ने स्वीकृत किया था। शिकायत पर जांच रिपोर्ट तैयार थी। उससे पहले ही उन्हें हटा दिया गया।












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