'ममता' पर क्यों आई मोदी को ममता ?
कोलकाता। भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी यूं तो गैर बीजेपी राज्यों में प्रदेश की सत्तारुढ़ सरकार पर हमलावर रुख अपनाते है, लेकिन कोलकाता की रैली में मोदी ने पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस की सरकार पर नरमी बरतते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर चुप्पी साधे रखी। मोदी ने पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना की, लेकिन तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर सीधा हमला करने से परहेज किया। ममता के गढ़ में मोदी उनपर हमला करने से बचते रहे। ना केवल मोदी हमले से बचते रहे बल्कि उन्होंने ये भी कहा कि बंगाल की जनता राज्य में ममता सरकार के माध्यम से परिवर्तन लाए और केंद्र में बीजेपी सरकार के जरिए। मोदी का ये रुख पहले देखने को नहीं मिला था। लेकिन उनके इस बर्ताव ने सवाल जरुर खड़ा कर दिया है कि मोदी ममता पर मौन क्यों रहे?

गठबंधन के खुले रहे विकल्प
मोदी ने ममता पर चुप्पी साधकर लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन के विकल्प खुले रखे है। हलांकि ममता इससे पहले यूपीए की सहयोगी रही हैं, लेकिन कई मसलों पर मतभेद के बाद उन्होंने यूपीए का साथ छोड़ दिया। ऐसे में मोदी टीएमसी के साथ अपने गठबंधन के विक्लप को खु ले रखना चाहते हैं।

लेप्ट के बाद तृणमूल बड़े पार्टी
पश्चिम बंगाल की सत्तारुढ़ पार्टी तृणमूल लेप्ट के बाद सबसे बड़ी पार्टी है। ऐसे में लोकसभा चुनाव से पहले मोदी ममता को नाराज नहीं करना चाहते है।

ममता की खिलाफत कर जीत मुश्किल
बीजेपी की हालत पश्चिम बंगाल में खस्ताहाल है। मोदी अपने पार्टी की स्थिति से वाकिफ है, ऐसे में वो जानते है कि ममता बनर्जी की खिलाफत कर वो यहां अपनी सीट नहीं बढ़ा सकते है।

पश्चिम बंगाल के पास 42 सीटें
पश्चिम बंगाल के पास लोकसभा की 42 सीटें है। अगर बीजेपी को लोकसभा चुनाव में बहुमत का आंकड़ा छुना है तो उन्हें पश्चिम बंगाल में सफल ता हासिल करनी होगी। मोदी के इस स्टैंड से कम से कम भविष्य में गठबंधन की संभावनाएं तो जीवित रहेंगी।

बंगाल को नजरअंदाज करना खतरनाक
मोदी के मिशन 272 के लिए बंगाल को नजरअंदाज करना खतरे से खाली नहीं है। राज्य की 42 लोकसभा सीट बीजेपी के लिए बड़ा अंतर साबित हो सकती है।

राजनाथ ने भी दिखाई हमदर्दी
भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने टीएमसी प्रमुख से थोड़ी हमदर्दी जताते हुए कर्ज के बोझ से दबे पश्चिम बंगाल की कर्जमाफी की मांग का समर्थन किया।












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