कुछ चरवाहों की मुस्कान, पूरे अफ्रीका की खुशी कब बनेगी

Provided by Deutsche Welle

लेटोयी लेरोशी बीते पांच दिन तक लगातार पानी की तलाश में भटक रहे थे. वे केन्या की साम्बुरू काउंटी में रहते हैं. लंबी तलाश के बाद उन्हें सूखी इवासो एनगीरो नदी में एक जगह पर हल्की सी नमी दिखाई पड़ी. लेरोशी ने भागकर इसकी जानकारी अपने साथी चरवाहों को दी. सबने पानी की उम्मीद में नदी के उस हिस्से को खोदने शुरू किया. कुछ फुट की खुदाई के दौरान ही पानी की धारा फूट पड़ी.

क्या सूखी नदियां और झीलें फिर से लबालब की जा सकती हैं?

युवा चरवाहे खुशी से झूम उठे, वे गाने लगे. उन्होंने विशेष आवाजें निकालकर अपने मवेशियों को पुकारा. प्यास से बेदम हो चुके पशुओं ने कई दिन बाद छककर गला गीला किया.

तबाह होती करोड़ों जिंदगियां

बीते कुछ दशकों से अफ्रीकी महाद्वीप का बड़ा हिस्सा भयानक सूखे का सामना कर रहा है. केन्या में ही कृषि और पशुपालन पर निर्भर हजारों लोगों का सब कुछ दांव पर है. लेटोयी लेरोशी कहते हैं, "चार साल पहले जब बहुत कम बारिश हुई, तब हमारे पास हजारों मवेशी थे. तब से हम सैकड़ों मवेशी खो चुके हैं. डर है कि अगर बारिश अब भी नहीं हुई तो हम अपना कुछ गंवा देंगे."जल चक्र में गड़बड़ी कर रहा है जलवायु परिवर्तन

सूखे के कारण केन्या में हर हफ्ते मारे जा रहे हैं सैकड़ों मवेशी

कभी अपने पशुओं के साथ सकून से घूमने वाले लेरोशी और उनके साथियों को अब हथियार भी रखना पड़ रहा है. वह कहते हैं, "हर किसी के पास हथियार हैं और दूसरे लोग भी हमारे पशुओं को चुराना चाहते हैं."

सूखे की वजह से पूर्वी अफ्रीका में भूख से मर सकते हैं लाखों लोग

संयुक्त राष्ट्र की जल एजेंसी का अनुमान है कि अफ्रीकी महाद्वीप में करीब 40 करोड़ लोगों के पास स्वच्छ पेयजल नहीं है. 54 साल के लेरोशी भी इनमें से एक हैं. पानी की तलाश में वे अपने परिवार को पीछे छोड़ भटकते रहे. इसी दौरान पानी की कमी से उनका दो साल का बेटा डिहाइड्रेशन और कुपोषण का शिकार हो गया. उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से वो जीवित नहीं लौटा.

भूजल से उम्मीद

ब्रिटेन की चैरिटी संस्था, वॉटरएड और ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे ने वैज्ञानिक तरीके से जांच कर पता लगाया है कि अफ्रीका में भूजल का बड़ा भंडार है. जमीन के भीतर इतना पानी है कि ज्यादातर देश पांच साल तक सूखे से लड़ सकते हैं. पूर्वी और उत्तर पूर्वी अफ्रीका में भूजल इस संकट से राहत दे सकता है. इंटरनेशनल वॉटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के हाइड्रोलॉजिस्ट गिरमा इब्राहिम कहते हैं, सूखे के खिलाफ भूजल में बड़ी संभावना है.

अफ्रीकी महाद्वीप में ऐसे 72 विशाल एक्विफर यानी जमीन के भीतर भूजल स्टोर करने वाले प्राकृतिक ढांचे हैं, जिन्हें अभी तक छुआ नहीं गया है. सूखे से निपटने के लिए 1997 में तांजानिया के सबसे बड़े शहर दार ए सलाम में, 2015-2016 में इथियोपिया में और 2017 में दक्षिण अफ्रीका में भूजल निकालने के प्रोजेक्ट शुरू हुए. ज्यादातर जगहों पर हैंड पंपों की मदद ली जाती है. कुछ संगठन इसे "गेम चेंजर" बता रहे हैं.

प्यास से लड़ने में मदद की जरूरत

कुछ विशेषज्ञ भूजल के अंधाधुंध दोहन के खिलाफ आगाह भी रहे हैं. केन्या वाइल्डलाइफ सर्विस के पूर्व निदेशक फिलिप वांडेरा कहते हैं, "भूजल का अत्यधिक दोहन नहीं किया जाना चाहिए. ये सूखे के खिलाफ कोई क्विक फिक्स समाधान नहीं है....अगर आप बहते पानी का प्रबंधन करने में लचर हैं तो मुमकिन है कि आप भूजल के साथ भी यही करेंगे."

केन्या के ग्रामीण इलाकों में कई किलोमीटर दूर से पानी लाते बच्चे

यूरोप, अमेरिका और एशिया के मुकाबले, तिनके जितना ग्रीनहाउस उत्सर्जन करने वाला अफ्रीकी महाद्वीप जलवायु परिवर्तन के भीषण नतीजों का सामना कर रहा है. भूजल की खोज और उसे सही तरीके से मैनेज करने करने लिए अफ्रीका के कई देशों को निवेश और तकनीकी मदद चाहिए. इसमें जितनी देर होगी, उतनी जानें जाएंगी.

30 साल के पशुपालक लेमेवास लिमायो कहते हैं, "दो हफ्तों के भीतर मैं 30 गायें खो चुका हूं. यही हालत रही तो कई और गायें मारी जाएंगी. सूखा हर जीवित चीज को निगलता जा रहा है."

ओएसजे/एनआर (एपी)

Source: DW

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