दो मजहबों के बीच एकता का प्रतीक है सोरों का मेला, यहां मुस्लिम बनाते हैं हिंदुओं के लिए कांवड़
कासगंज। यूपी में कासगंज जिले के सोरों विकास खंड क्षेत्र का गांव कादरवाड़ी सांप्रदायिक सौहार्द का जीता-जागता उदाहरण है। यहां ऐसा नज़ारा देखने को मिलता है कि लोग हिंदू-मुस्लिम का फर्क करना भूल जाते हैं। मुस्लिम-हिन्दू यहां एकता का संदेश देते रहे हैं। गंगा को अपनी कमाई का श्रोत बनाकर प्रतिवर्ष लाखों रुपये जुटा लेते हैं। सोरों विकास खण्ड कडरवाड़ी में हिन्दू परंपरा के तहत लगने वाले श्रावन मास में कांवड़ मेले में कारीगर मुस्लिम हैं और खरीदारी करने वाले ज्यादातर हिंदू हैं।

यहां कांवड़ मुस्लिम परिवार बनाकर बेचते हैं। उन्हें यह काम विरासत में मिला है। जैसे ही कांवड़ यात्रा आती है, वैसे ही कई मुस्लिम परिवार हिन्दू भाइयों के लिए कांवड़ बनाते हैं। इन कांवड़ को लेकर ही हिन्दू जल लाते हैं। मुस्लिम मजहब के 65 वर्षीय सत्तार ने बताया कि तीन सौ वर्षो से गांव में गंगाजल भरने के लिए कांच की शीशी तैयार होती रही हैं। जिसमें कावंडिए जल भरकर ले जाते हैं।

संवाददाता ने जब गांव में कांच की शीशी बनाने वाले लोगों से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि पीढ़ी दर पीढ़ी वे कांच की शीशी बनाते आ रहे हैं। यहां भूमिहीन लोग ज्यादा हैं और सरकार भी कोई मदद नहीं करती। ऐसे में सबसे अधिक मुनाफा सोरों के दुकानदार करते हैं, उनसे ब्याज पर रुपये लेकर वह लकड़ी और सामान को खरीदकर अपना काम करते हैं।'

'गंगा मैया की कृपा से हमें कांच की शीशी बनाने का आशीर्वाद मिला है। गंगा मैया की कृपा से हमारे परिवार का भरण-पोषण होता है।'
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