कानपुर शूटआउट केस: आखिर कहां गया राहुल तिवारी, जिसने विकास दुबे पर दर्ज कराई थी FIR

कानपुर। कानपुर शूटआउट केस का मुख्य आरोपी और पांच लाख रुपए का इनामी मोस्ट वांटेड विकास दुबे 10 जुलाई को यूपी एसटीएफ के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया था। अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है। दरअसल, चौबेपुर थाने में विकास दुबे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने वाला शख्स राहुल तिवारी बीते 14 दिनों से लापता है। जिसका पुलिस अभी तक कुछ पता नहीं लगा सकी है। बता दें कि राहुल तिवारी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर पर ही पुलिस 2 जुलाई की देर रात विकास दुबे के गांव बिकरू में दबिश देने के लिए गई थी।

राहुल तिवारी की तलाश में जुटी पुलिस

राहुल तिवारी की तलाश में जुटी पुलिस

विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम का नेतृत्व बिल्हौर सीओ (सर्किल ऑफिसर) देवेंद्र मिश्रा कर रहे थे। इस बात की जानकारी विकास दुबे को पहले से ही लग गई थी, जिसके बाद विकास दुबे और उसके गैंग के सदस्यों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। इस फायरिंग में बिल्हौर सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इसी मामले में अब पुलिस राहुल तिवारी की तलाश में जुट गई है। दरअसल, राहुल तिवारी शिकायतकर्ता होने के अलावा उन घटनाओं से जुड़े मामले का प्रमुख गवाह है, जिनके कारण यह घटना हुई।

बीते 14 दिनों से लापता है राहुल तिवारी

बीते 14 दिनों से लापता है राहुल तिवारी

वहीं, राहुल तिवारी के परिवार के सदस्यों के मुताबिक वो बीते 14 दिनों से लापता है। राहुल तिवारी की मां सुमन देवी ने बताया कि राहुल ने आखिरी बार उनसे 2 जुलाई की रात को बात की थी। उसने फोन पर डरी हुई आवाज में बात की, इसके बाद अपनी पत्नी, बच्चों और भाभी के साथ गायब हो गया। कानपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार पी ने कहा कि राहुल की जान को भी गंभीर खतरा है। डिप्टी एसपी सुकर्म प्रकाश के नेतृत्व में एक टीम उसकी तलाश कर रही है।

विकास दुबे ने पीटा था राहुल को

विकास दुबे ने पीटा था राहुल को

बता दें कि पुलिस की जांच के अनुसार, बिकरू से सटे जडेपुर निवाड़ा गांव में रहने वाले राहुल तिवारी, मोनिका निवाड़ा गांव में अपनी ससुराल से संबंधित ज़मीन का निपटान करना चाहते थे, जो आसपास के इलाके में भी स्थित है। उनकी पत्नी की बहनों ने प्रस्तावित बिक्री का विरोध किया। उनमें से एक (जो बिकरू में रहता है) पक्ष ने मामले में विकास दुबे के हस्तक्षेप की मांग की। पुलिस जांच के अनुसार, राहुल तिवारी को 1 जुलाई को दुबे द्वारा सार्वजनिक रूप से धमकी दी गई और पीटा गया। अगले दिन उन्होंने चौबेपुर के तत्कालीन स्टेशन अधिकारी विनय तिवारी को एक लिखित शिकायत दी थी।

सीओ के हस्तक्षेप से एफआईआर

सीओ के हस्तक्षेप से एफआईआर

पुलिस के अनुसार, चौबेपुर थाना प्रभारी ने शिकायत दर्ज करने के बजाय राहुल तिवारी को उनके साथ जाने के लिए कहा और दुबे से सुलह के लिए मुलाकात की। इस घटना के बाद 2 जुलाई की शाम को बिल्हौर सर्कल अधिकारी, डीएसपी देवेंद्र मिश्रा के हस्तक्षेप पर एफआईआर दर्ज की गई थी। कुछ घंटे बाद मिश्रा ने एक टीम को इकट्ठा किया, जिसमें तीन पुलिस स्टेशन के अधिकारियों सहित 25 पुलिसकर्मी शामिल थे। फिर बिकरू पर छापा मारा गया, जहां गैंगस्टर और उसके लोगों ने पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला किया और उनमें से 8 को मार डाला। गोलीबारी में सात पुलिसकर्मी, एक होमगार्ड और एक नागरिक घायल हो गए।

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