Exclusive: कानपुर में गंगा नदी के लिए बना 'मोदी एक्शन प्लान'

पाथवे बनने से गंगा में उसके किनारे बसे शहरों और गांवों की गंदगी सीधे नहीं बहाई जा सकेगी। साथ ही गंगा किनारे के शहरों और गांवों में हर साल आने वाली बाढ़ से भी निज़ात मिलेगी। इसके लिए जल्द ही पांच मंडलों के कमिश्नरों की बैठक होगी। आईआईटी की विशेषज्ञ टीम पहले से तैयार है। यदि सहमति बनती है तो प्रस्ताव प्रदेश सरकार के माध्यम से केन्द्र सरकार को भेजा जाएगा। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठते ही यह प्रस्ताव जल्द ही दिल्ली भेजा जाएगा।
कानपुर की इस योजना पर चर्चा गंगा बैराज पर बोट क्लब के प्रस्ताव के साथ शुरु हो गई थी। हाईपॉवर प्रशासनिक कमेटी के कोऑर्डिनेटर नीरज श्रीवास्तव ने बोट क्लब के साथ गंगा किनारे रहने वाले मल्लाहों और गोताखोरों के बच्चों को इसमें ट्रेनिंग देने का प्रस्ताव रखा था। कमेटी ने इसको और विस्तार देकर शासन की योजना भेजी। उनका कहना था कि थोड़ी सी ट्रेनिंग से बच्चे वाटर स्पोर्ट्स में दुनिया में नाम कमा सकते हैं। इसमें गंगा पर हर सौ मीटर पर इस तरह के बोट क्लब स्थापित करने का प्रस्ताव था। वोट क्लब से ही रिवर फ्रंट डेवलपमेंट का विचार निकला है।
'अच्छे दिन' आते ही विश्व बैंक भी हुआ मेहरबान
विश्व बैंक के जल विशेषज्ञों और सिंचाई विभाग के इंजीनियरों को गुजरात में नहरों का संजाल पसंद आन लगा है। गुजरात में नहरों के मॉडल को अब सूबे में उतारने की तेयारी है। कानपुर नगर और कानपुर देहात के गांवों में गांवों में बह रही निचली गंगा की दोनों नहरों का पुररुद्धार करने के लिए सर्वे शुरु हो गया है। बीते दिन विश्व बैंक टीम ने निरीक्षण किया इसकेलिए विश्व बैंक 28 करोड़ की मदद करेगा। पैक्ट योजना के तहत नरोरा बांध से निचली गंगा नहर को नए सिरे से सुधारने का फैंसला किया है।
मौजूदा समय में इसकी क्षमता 4850 क्यूसेक पानी की है, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 8950 क्यूसेक कारने की योजना है। दोनों नहरों का निरीक्षण विश्व बैंक के जल विशेषज्ञ जुन मस्ट मोटो और इसे बोरवर्कर कर चुके हैं। टीम ने दौरा कर हालात का जायजा लिया। जिस तरह से गुजरात में जल योजनाओं पर काम हुआ है, उसी मॉडल को ध्यान में रखते हुए इस बार कानपुर की जल वयवस्था में सुधार के कदम उठाए जाने लगे हैं।












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