Kanpur: अब AI बताएगा सप्लाई लाइन में कहां हुआ है फॉल्ट, घटती-बढ़ती बिजली की डिमांड का भी लगाएगा अनुमान

Kanpur News: अभी तक बिजली सप्लाई बंद होने पर लाइनमैन गली-गली जाकर फॉल्ट खोजने थे। फॉल्ट मिलने और सप्लाई चालू होने में काफी समय लग जाता था। लेकिन, अब यह कानपुर जिले में बीते समय की बात होने वाली है। जी हां...स्काडा सिस्टम के तहत पूरा बिजली वितरण नेटवर्क कानपुर में ऑनलाइन हो गया है।

एनबीटी की खबर के मुताबिक, अब कानपुर जिले में अचानक बिजली लाइन में फॉल्ट आने के बाद तुरंत बताया जा सकेगा कि कहां पर फॉल्ट हुआ है। अपने सही सुना, AI सॉफ्टवेयर की मदद से अब कंट्रोल रूम में बैठे शख्स बिजली की लाइन में फॉल्ट कहां पर हुआ है ये बात तुरंत पता चल जाएगी।

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इतना ही नहीं, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से मशीन लर्निंग के जरिए बिजली की घटती-बढ़ती मांग का भी आकलन किया जा सकेगा। यह सुविधा कानपुर स्मार्ट सिटी प्रॉजेक्ट के अंतर्गत शहर के 14 सबस्टेशनों पर शुरू होगी। इतना ही नहीं, बिजली सप्लाई की सुपरवाइजिंग कंट्रोल ऐंड डेटा एक्विजिशन (स्काडा) के जरिए की जाएगी।

जल्द शुरू कर दिया जाएगा प्रॉजेक्ट
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस योजना के तहत हाइटेंशन लाइन से लेकर ट्रांसफॉर्मर और उपभोक्ता के घर लगे मीटर की रियल-टाइम जानकारी कंट्रोल रूम से मॉनिटर की जा सकेगी। इसमें हर सबस्टेशन, पोल, ट्रांसफॉर्मर, सप्लाई लाइन और मीटर की जीपीएस मैपिंग की गई। इस प्रॉजेक्ट जल्द ही आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया जाएगा।

घटती-बढ़ती बिजली की डिमांड का लगाएगा अनुमान
AI और मशीन लर्निंग के जरिए मौसम को देख सॉफ्टवेयर बताएगा कि आने वाले दिनों में बिजली की मांग कहां तक पहुंचेगी। साल के अंत तक सिस्टम पूरी तरह स्वचालित हो जाएगा।

स्काडा सिस्टम ऐसे करेगा काम
कानपुर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी (केस्को) के अधिशासी अभियंता (ईई) तोयज भूषण मिश्रा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि सप्लाई नेटवर्क मुख्य तौर पर 3-4 डिवाइसों पर टिका है। सभी 14 सबस्टेशन, ट्रांसफॉर्मर, 33 केवी और 11 केवी वैक्यूम सर्किट ब्रेकर पर रिमोट टर्मिनल यूनिट (आरटीयू) लगाई गई है।

आरटीयू से कंट्रोल रूम में हर मिनट डेटा पहुंच रहा है। इसके अलावा बारिश, पेड़ की डाल चिपकने या पतंग का मांझा गिरने पर फीडर बंद होते ही ऑटो री-क्लोजर डिवाइस हर 30 सेकंड में फीडर चालू करने का प्रयास करेगा। ऐसे प्रयास तीन बार किए जाएंगे। इससे आपूर्ति में अनावश्यक व्यवधान नहीं आएगा।

सेक्शन्लाइजर को हर फीडर पर लगाया जाएगा
तीसरी महत्वपूर्ण डिवाइस सेक्शन्लाइजर है। सेक्शन्लाइजर को हर फीडर में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर लगाया जाएगा। इस डिवाइस का फायदा यह होगा कि फॉल्ट की स्थिति में किसी एक सेक्शन्लाइजर से जुड़े छोटे से हिस्से की ही सप्लाई बंद होगी। दो सेक्शन्लाइजर के बीच फॉल्ट भी आसानी से पता चल सकेगा।

लाइन लॉस घटेगा
तोयज भूषण मिश्रा ने बताया कि हर ट्रांसफॉर्मर और हर सप्लाई लाइन से होने वाली बिजली आपूर्ति का अलग लेखा-जोखा दर्ज होगा। ट्रांसफॉर्मर से उपभोक्ता के घर के बीच बिजली चोरी भी आसानी से पकड़ी जा सकेगी। इतना ही नहीं, कानपुर में लगे सभी ट्रांसफॉर्मर को इंटरनेट से जोड़ने के लिए एक-एक मॉडेम लगाया गया है।

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