कानपुर में सड़क पर अधिवक्ता और पुलिसकर्मी के बीच हाथापाई, घटना सीसीटीवी में हुई कैद
उत्तर प्रदेश के कानपुर में सड़क पर अधिवक्ता और पुलिसकर्मी के बीच जमकर हुई हाथापाई का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। स्टैंड में खड़ी गाड़ियों का जबरन चालान करने को लेकर अधिवक्ता और ट्रैफिक पुलिसकर्मी के बीच पहले बहस हुई फिर अचानक ही थप्पड़ बाज़ी शुरू हो गई। मारपीट की यह घटना सीसीटीवी कैमरा में कैद हो गई, जिसके बाद ट्रैफिक पुलिसकर्मी की तहरीर पर अधिवक्ता और उसके साथियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हो गया है।

सीसीटीवी में कैद हुई पूरी घटना
सयुंक्त पुलिस आयुक्त आनंद प्रकाश तिवारी ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना कानपुर कोतवाली क्षेत्र में महिला थाने के पास हुई है। अधिवक्ता गढ़ों ने एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी के साथ न केवल दुर्व्यवहार किया है बल्कि उसके साथ मारपीट भी की है। जो कैमरे सड़को पर नगर निगम की तरफ से लगे हैं उनमे से एक सीसीटीवी कैमरा में पूरी घटना कैद हो गई। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है की अधिवक्ता द्वारा किया गया कार्य विधि विरुद्ध है। कोतवाली थाने में मामले को दर्ज किया गया है। जल्द से जल्द इसपर उचित कार्रवाई की जाएगी।
वही अधिवक्ता पक्ष का कहना है की ट्रैफिक पुलिसकर्मी जबरन चालान काट रहा था। उन्होंने ऐसा करने से मन किया तो इन्होने दुर्व्यवहार किया। हालांकि वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है की पहले हाथ अधिवक्ता ने उठाया था। फुटेज में ऑडियो न होने के कारण यह कह पाना तो मुश्किल है की गलती असल में किसकी है। फ़िलहाल मामले को आला अधिकारी बेहद ही बारीकी से जांच रहे है और जल्द ही इसमें आगे की कार्यवाही देखने को मिलेगी।

वकील और पुलिस का रिश्ता
वकीलों और पुलिस के बीच विगत मे कई हिंसात्मक झडपें हो चुकी हैं। इन झडपों का मुख्य कारण ईगो या अँहकार था जहाँ वकीलों को पुलिस विभाग की पुलिसगिरी नहीं पसंद आई । वकीलों की एक बात प्रशंसनीय है कि चाहे इनकी आपस मे लाख प्रतिद्वंद्विता हो किन्तु किसी पुलिस अधिकारी द्वारा इनकी शान मे जरा सी गुस्ताखी हुई नहीं कि वकील वर्ग तुरंत पुलिस के विरुद्ध मोर्चा खोल लेते हैं और उसी समय छोटे बडे सभी वकील कंधे से कंधा मिला कर खडे दिखाई देते हैं किन्तु पुलिस विभाग में ऐसा होने पर सीधे टकराव से बचने की पुरी जद्दोजहद करी जाती है शायद, पुलिस विभाग की नौकरी आडे आती है। जबकि वकील वर्ग को ऐसी कोई बाध्यता नहीं होती है।
पर आखिरकार , पुलिस अधिकारियों की बदौलत ही वकीलों को नये केस मिलते हैं। जितना अधिक किसी वकील की पुलिस विभाग मे निकटता होगी उतना ही उनको केस मिलने की सम्भावना रहती है। क्योंकि पुलिस अधिकारियों को ही " दीवाली अथवा होली " के गिफ्ट वकील साहब से मिलेंगे।












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