झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन पर लटकी अयोग्यता की तलवार, खतरे में कुर्सी, पूरा मामला जानिए
रांची, 21 अप्रैल: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है। उनपर सीएम रहते हुए अपने नाम से माइनिंग का ठेका लेने का आरोप है। झारखंड के गवर्नर रमेश बैस ने इस मामले में संविधान के प्रावधानों के तहत चुनाव आयोग से राय मांगी है। चुनाव आयोग को इस मामले की तहकीकात करके राज्यपाल को सलाह देना होगा। अगर चुनाव आयोग ने आरोपों को सही ठहराते हुए राज्यपाल को अपनी राय भेजी तो सीएम सोरेन को विधानसभा की सदस्यता के अयोग्य ठहराया जा सकता है, जिसकी वजह से उनकी सीएम की कुर्सी भी जा सकती है।

हेमंत सोरेने की विधायकी पर अयोग्यता का खतरा
चुनाव आयोग को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को खनन का पट्टा दिए जाने के संबंध में राज्यपाल की ओर से भेजे गई सूचना की जांच करनी है। अगर चुनाव आयोग की जांच में यह पाया जाता है कि जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के तहत आरोप सही हैं तो सीएम सोरेन को एमएलए की सदस्यता से अयोग्य करार दिया जा सकता है और इससे उनके मुख्यमंत्री की कुर्सी खतरे में पड़नी तय है। इस विवाद ने झारखंड के राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मचाया हुआ है और खासकर राजभवन की ओर से चुनाव आयोग को मामला भेजे जाने से इसकी गंभीरता ज्यादा बढ़ गई है। झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस ने संविधान के आर्टिकल 192 के तहत चुनाव आयोग से राय मांगी है, जिसके तहत उन्हें अधिकार है कि वह चुने हुए सदस्य को ईसी की राय पर अयोग्य करार देने पर कोई फैसला ले सकें।

राज्यपाल ने चुनाव आयोग से मांगी राय
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक चुनाव आयोग ने कहा है कि 'हम जिला खनन विभाग की ओर से हेमंत सोरेन को रांची जिले के अंगारा ब्लॉक में 0. 88 एकड़ जमीन के लिए जून, 2021 में दिए गए खनन पट्टे (लेटर ऑफ इंटेंट) के मुद्दे को समग्र रूप में देखेंगे। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9 और धारा 8ए के तहत पद पर रहते हुए सरकारी ठेकों और सप्लाई को लेकर भ्रष्ट आचरण पाए जाने पर एक निर्वाचित प्रतिनिधि की अयोग्यता का प्रावधान है।' चुनाव आयोग इस मामले को संविधान के उन प्रावधानों के तहत भी देखेगा, जिसमें संवैधानिक पद पर रहते हुए ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के तहत अयोग्य करार दिया जा सकता है।

खतरे में पड़ सकती है कुर्सी
चुनाव आयोग ने इसी हफ्ते राज्यपाल के सवालों को लेकर राज्य सरकार से पिछले साल मुख्यमंत्री को आवंटित खनन पट्टे के बारे में सारी डिटेल देने को कहा है। दरअसल, इस मामले में मुख्यमंत्री हेमंत के बारे में पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास समेत बीजेपी नेताओं ने राज्यपाल से शिकायत की थी, जिसके बाद उन्होंने संविधान के आर्टिकल 192 के तहत चुनाव आयोग से राय देने को कहा है। इस आर्टिकल के तहत अगर चुनाव आयोग सोरेन के खिलाफ रिपोर्ट देता है तो गवर्नर को उन्हें अयोग्य करार देने का अधिकार है। चुनाव आयोग ने झारखंड के मुख्य सचिव से माइनिंग लाइसेंस से संबंधित सभी प्रमाणित दस्तावेजों के साथ ही, नियमों और शर्तों के बारे में भी जानकारी मांगी है, ताकि पता लगाया जा सके कि प्रक्रिया में किसी नियम का उल्लंघन तो नहीं हुआ है। लेकिन, जिस तरह से यह माइनिंग ठेका सीएम सोरेन के खुद के नाम पर होने की बात आ रही है, इससे उनकी मुश्किल बढ़ गई हैं।












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