ग्रेजुएट चायवाली के बाद सुर्खियों में पोस्ट ग्रेजुएट चायवाली, जानिए कौन हैं राधा यादव ?

पोस्ट ग्रेजुएट चाय वाली राधा ने बताया कि कोरोना काल में उसकी नौकरी चली गई थी। नौकरी जाने के बाद समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं ? काफी सोचने के बाद चाय का व्यापार करने का फ़ैसला लिया।

रांची, 13 सितंबर 2022। चाय का व्यापार पूरे देश के युवाओं की पहली पसंद बन चुका है,एमबीए चाय वाला के बाद कई युवाओं ने चाय का रोज़गार किया और अच्छी कमाई भी कर रहे हैं। वहीं बिहार की राजधानी पटना में तो दो बेटियों ने चाय के व्यापार से काफी सुर्खियां बटोरी। पोस्ट ग्रेजुएट चाय वाली और आत्मनिर्भर चाय वाली की चर्चाओं के बाद एक और पोस्ट ग्रेजुएट चाय वाली सुर्खियों में हैं। राधा नाम की युवती ने बिहार से सटे राज्य झारखंड के देवघर में एक कॉलेज के सामने पोस्ट ग्रेजुएट चाय वाली के नाम से टी स्टॉल खोला है।

पोस्ट ग्रेजुएट चाय वाली राधा यादव

पोस्ट ग्रेजुएट चाय वाली राधा यादव

पोस्ट ग्रेजुएट चाय वाली राधा ने बताया कि कोरोना काल में उसकी नौकरी चली गई थी। नौकरी जाने के बाद समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं ? काफी सोचने के बाद चाय का व्यापार करने का फ़ैसला लिया। पहले तो झिझक महसूस हो रही थी कि कैसे शुरुआत करूं, लेकिन हौसले को बुलंद करते हुए टी स्टॉल लगा ही लिया। झारखंड के देवघर में ककॉलेज के सामने राधा ने टी स्टॉल लगाया है।

रामा देवी बाजला महिला कॉलेज के पास टी स्टॉल

रामा देवी बाजला महिला कॉलेज के पास टी स्टॉल

रामा देवी बाजला महिला कॉलेज के पास टी स्टॉल लगाने के पीछे की वजह बताते हुए राधा ने कहा कि महिला कॉलेज के पास छात्राएं भी चाय पी सकेंगी। कॉलेज के पास छात्रों के होने से टी स्टॉल अच्छा चल सकेगा। राधा अपने टी स्टॉल पर रोजाना क़रीब 1600 रुपये की चाय की बिक्रि कर ले रही हैं। वह टी स्टॉल से हर महीने 45 से 50 हज़ार रुपये तक कमा ले रही हैं।

कोठिया गांव की रहने वाली है राधा

कोठिया गांव की रहने वाली है राधा

राधा यादव के टी स्टॉल पोस्ट ग्रेजुएट चाय वाली के साथ ही पंच लाइन 'कुल्हड़ की चाय पिया करो, इससे देश की मिट्टी चूमने का अवसर मिलेगा'। इससे भी लोग काफी आकर्षित हो रहे हैं। राधा के परिवार की बात की जाए तो वह देवघर से 5 किलोमीटर दूर कोठिया गांव (देवघर प्रखंड) की रहने वाली हैं। उनके 5 बहनें और 1 भाई हैं। सभी में राधा यादव बड़ी हैं। वहीं उनके भाई-बहन अभी पढ़ाई ही कर रहे हैं।

प्राइवेट जॉब करती थी राधा यादव

प्राइवेट जॉब करती थी राधा यादव

राधा यादव के परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी इसलिए उन्होंने प्राइवेट जॉब की थी, लेकिन कोरोना काल की वजह से उनकी नौकरी चली गई। चूंकी घर का बोझ उन्हीं पर था, और उनके पास ज़्यादा पूंजी नहीं थी इसलिए हिम्मत जुटाते हुए टी स्टॉल लगाने का फैसला लिया। शुरू में तो झिझक महसूस कर रही थी लेकिन बाद में उन्होंने बाजला महिला कॉलेज के पास टी स्टॉल लगा लिया। आज की तारीख में वह अच्छी कमाई कर रही हैं।

परिवार की जिम्मेदारी उठा रही राधा

परिवार की जिम्मेदारी उठा रही राधा

राधा के टी स्टॉल लगाने वाली बात परिवार में सिर्फ़ मा ही जान रही थी । मीडिया में हुए चर्चे के बाद अन्य लोगों को भी इसकी जानकारी हुई। वहीं राधा के टी स्टॉल पर स्थानीय लोगों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राधा ने बहुत ही सही फ़ैसला लिया। एक सही फ़ैसले ने राधा की मुश्किलें आसान कर दी हैं। अब वह घर चलाते हुए अपने भाई-बहनों को सही शिक्षा भी दे पा रही हैं। कई लोग तो सोचते हैं कि ग्रैजुएट होकर चाय कैसे बेचें, इस मानसिकता को बदलते हुए आत्मनिर्भर बनने के लिए आपको जो रोजगार अच्छा लगे आप वह करें।

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