Jharkhand Chunav 2024: क्या थे 2019 में एग्जिट पोल के नतीजे और क्या आए थे परिणाम?
jharkhand Exit Poll: महाराष्ट्र और झारखंड में आज वोटिंग समाप्त होने के साथ एग्जिट पोल आने शुरू हो जाएंगे। इस बार झारखंड में 2 चरणों में जबकि महाराष्ट्र की सभी 288 विधानसभा सीटों पर एक ही दिन वोटिंग हुई है। चुनाव के नतीजे 23 नवंबर को घोषित किए जाने हैं लेकिन मतदान समाप्त होने के साथ ही कई सर्वेक्षण एजेंसियां और टीवी न्यूज चैनल अपने एग्जिट पोल पूर्वानुमान जारी करने के लिए तैयार हैं।
लोकसभा चुनाव हो या बीते जम्मू-कश्मीर और हरियाणा के विधानसभा चुनाव, हर बार ही एग्जिट पोल के नतीजे गलत साबित हुए हैं। मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद इस बार भी झारखंड और महाराष्ट्र चुनाव के एग्जिट पोल सामने होंगे। आइए एक नजर डालते हैं कि 2019 में झारखंड विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल कितने सटीक थे।

झारखंड एग्जिट पोल 2019 विधानसभा चुनाव
झारखंड चुनाव 2019, 30 नवंबर से 20 दिसंबर 2019 के बीच हुए थे। इस दौरान झारखंड की 81 सीट पर 5 चरणों में मतदान हुए थे। कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) सहित संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) ने इस चुनाव में जीत दर्ज की थी। हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले जेएमएम को 30 सीटें मिली थी, भाजपा को 25 और कांग्रेस के खाते में 16 सीटें आईं थी।
- इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया (India Today-Axis My India) ने जेएमएम-कांग्रेस नेतृत्व वाले यूपीए को बढ़त दी थी। उन्होंने कहा कि यूपीए 43 सीटें जीतेगा, जबकि भाजपा 27 सीटें जीतेगी।
- एबीपी-सीवोटर (ABP-C Voter) ने त्रिशंकु विधानसभा की भविष्यवाणी की थी। उन्होंने कहा कि यूपीए 35 सीटें जीतेगा जबकि भाजपा 32 सीटें जीतेगी।
- टाइम्स नाउ (Times Now) ने यूपीए के लिए 44 सीटें और भाजपा के लिए 28 सीटों की भविष्यवाणी की थी।
चुनाव आयोग ने एग्जिट पोल पर क्या कहा
हाल ही में हरियाणा चुनाव में अधिकांश एग्जिट पोल द्वारा कांग्रेस की जीत गलत तरीके से भविष्यवाणी करने के बाद, कई दलों ने मतगणना प्रक्रिया पर संदेह जताया था। हाल ही में, मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि मीडिया, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को एग्जिट पोल से उत्पन्न होने वाली अपेक्षाओं पर आत्मनिरीक्षण करने की आवश्यकता है।
चुनाव आयोग के मुख्य सचिव राजीव कुमार ने कहा था, "एग्जिट पोल द्वारा निर्धारित अपेक्षाओं के कारण एक बड़ी विकृति उत्पन्न होती है। यह एक मुद्दा है जिसे आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता है, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए।" उन्होंने राष्ट्रीय प्रसारण संघ (एनबीएसए) जैसे स्व-नियामक निकायों से मीडिया संस्थाओं को विनियमित करने का आग्रह किया।












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